जीवन में हमेशा खुश रहने के तरीके - 8 Happy Life Tips in Hindi - Happiness Tips

जीवन में हमेशा खुश रहने के 8 आसान तरीके – Learn How to Live a Happy Life!

जीते तो सभी हैं, पर सुकून भरा जीवन कितने लोग जीते हैं, यह सोचने की बात है। हर दिन वही भागदौड़, वही तनाव…जिंदगी में खुशियां रूठती चली जाती हैं। लेकिन आठ सीढ़ियां हैं, जिन पर चलकर आप मंजिल पा सकते हैं, सुकून महसूस कर सकते हैं और सबसे बड़ी बात कि आप हमेशा खुश रह सकते हैं।

दिन भर की व्यस्तता और असंतुलित जीवनशैली का असर हमारे जीवन पर दिखने लगा है। जिस खुशी को पाने के लिए हम अपनी पूरी ताकत और समय लगा देते हैं, उसी से हम महरूम रहते हैं। ऐसे में हमारे पास न तो खुद के लिए समय होता है और न ही सगे-संबंधियों के लिए। समय बीतने के बाद एहसास होता है कि जिस सुख को पाने के लिए हम भाग रहे थे, उस खुशी से तो हमने स्वयं ही किनारा किया है। खासकर आज की युवा पीढ़ी के बीच यह चलन ज्यादा देखने को मिल रहा है। देर रात जश्न, सुबह देर तक सोना या फुर्सत के पलों में इंटरनेट की दुनिया में खो जाना! इन सब के बीच नाते-रिश्तेदार, अच्छे दोस्त सब दरकिनार होने लगे हैं और इसी अव्यवस्‍था से उपज रहा है आक्रोश। लोगों में धैर्य नहीं है। हर बात पर गुस्सा आना सामान्य बात है। क्या बच्चे, क्या बड़े, जीवन जीने का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। अगर आप जिंदगी को महसूस करते हुए खुशी से जीना चाहते हैं, तो जीवन के इन 8 सिद्धांतों पर जरूर विचार करेंं।

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ना खोएं आत्‍मविश्‍वास

भले ही आपके पास कितनी ही डिग्रियां एवं योग्यताएं क्यों न हों, यदि आप में आत्मविश्वास नहीं है, तो सब बेकार है। आत्मविश्वास आपका जीवन ही नहीं बनाता, बल्कि आपके व्यक्तित्व को दोगुना बल भी देता है। आत्मविश्वास से किसी भी काम को करने और उस तक पहुंचने की एक साफ तस्वीर उभर के सामने आने लगती है। इससे कामयाबी के प्रति मन में भरोसा पैदा होता है। आत्‍मविश्‍वास एक ऐसा हथियार है, जो विपरीत परिस्‍थितियों में आपको कमजोर नहीं होने देता। यह विश्‍वास आपको सामर्थ्‍य देता है और सफलता की ओर अग्रसर करता है। इसलिए विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आत्मविश्वास को डगमगाने न दें। बेशक इससे अापका दुख कम न हो, पर तकलीफ से उबरने और आगे बढ़ने का साहस तो मिलेगा ही।

अपना नजरिया बदलें

आपका चीजों को देखने का नजरिया आपके जीवन की गुणवत्ता निर्धारित करता है। जैसा हमारा नजरिया होता है, वैसी ही हमारी सोच बनती है। किसी विषय पर संकुचित एवं छोटी सोच से हमेशा निराशा ही हाथ्‍ा लगती है। अगर आपको अपना नजरिया बदलने में दिक्‍कत हो रही है, तो परेशान न हों, क्‍योंकि मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि आपके शरीर को किसी नई चीज से सामंजस्‍य बैठाने में कम से कम 40 दिन लगते हैं। फिर देर किसी बात की, अभी से इस पर काम करना शुरू कर दीजिए।

जरूरी है भावनाओं का संतुलन

मेंटल (मस्तिष्क), भावना (दिल), स्पिरिचुअल (विश्वास) और फिजिकल (बॉडी), जीवन के चार आध्‍ाार हैं, जिनका हमारे जीवन पर सबसे ज्यादा असर रहता है। अगर इन चारों में बैलेंस है और इन पर आपका नियंत्रण है, तो आप अपने जीवन को बेहतर तरीके से जी पायेंगे। याद रखिए, असंतुलित भावनाएं न सिर्फ दूसरे लोगों के साथ आपके संबंधों को खराब करती हैं, बल्‍कि आपके जीवन की गुणवत्‍ता को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए जिंदगी के इन चार आधारों में धीरे-धीरे सामंजस्य बिठाने की कोशिश करें।

इस क्षण (आज) में जिएं

इंसान के ठीक से न जी पाने का कारण है उसका वर्तमान में न जीना। हम या तो बीते हुए कल में जीते हैं या आने वाले कल की चिंता करते रहते हैं। अतीत को बदलने में लगे रहते हैं या फिर भविष्य को जानने में लगे रहते है। याद रखें, बीता हुआ कल वापस नहीं आ सकता और भविष्य में भी कुछ निश्चित नहीं है। आज आपका है और यही वास्तविक भी है। इसलिए आज में जिएं। जाग्रत जीवन जीने का मंत्र यही है कि बीते कल से सबक लिया जाए, भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए योजनाएं बनाई जाएं, लेकिन उन्‍हें पूरे करने के प्रयास वर्तमान में ही किए जाएं। मनोवैज्ञानिकों का भी मानना है कि हमारी 90 प्रतिशत चिंताएं काल्‍पनिक होती हैं, केवल 10 प्रतिशत ही वास्‍तविक होती हैं।

सकारात्‍मक सोच विकसित करें

मनोवैज्ञानिक भी मानते हैं कि पॉजिटिव थिंकिंग से रास्ते की मुश्किलें हल हों या न हों, मन का तनाव जरूर कम हो जाता है। शोधों के अनुसार, सकारात्मक सोचने वालों की उम्र भी अधिक होती है। कुल मिलाकर सकारात्मक सोच ′हैप्पी लांग लाइफ′ की कुंजी है।

मोटिवेशनल गुरु शिव खेड़ा कहते हैं कि हमारी सोच ही हमें सफलता प्रदान करती है। हम अगर कल के बारे में अच्छा सोचेंगे, तो हमारा आने वाला कल नि:संदेह अच्छा होगा। सकारात्मक सोच और लगन से किया गया कार्य जरूर सफल होता है। सकारात्मक सोच का संबंध सिर्फ आपके करियर से ही नहीं है, यह आपके पारिवारिक, सामाजिक आैर स्‍वास्‍थ्य जीवन से भी जुड़ा हुआ है। कभी आपने गौर किया है कि जब आप जीवन के प्रति सकारात्मक बातें करते हैं, तो बहुत से लोग आपकी ओर आकर्षित होते हैं। वहीं अगर आप हर समय जीवन के नकारात्मक पहलुओं को ही कुरेदती रहते हैं, तो हर कोई आपके साथ से बचना ही चाहता है।

कई अध्‍ययनों में भी यह बात सामने आई है कि नकारात्‍मक विचार नए अवसरों के लिए आपके मस्‍तिष्‍क को बंद कर देते हैं, जबकि सकारात्‍मक सोच और आशावादिता अवसरों के नए द्वार खोलती है। सकारात्‍मक सोच रखने वाले लोग अधिक स्‍वस्‍थ होते हैं, उन्‍हें तनाव भी कम होता है और वे जीवन का अधिक आनंद ले पाते हैं।

जानिए: कैसे पाएं नकारात्मक सोच से छुटकारा।

आज लोगों को ढेर सारी सुख-सुविधाएं मिली हुई हैं। हमारी पूरी जीवनशैली टेक्नोलॉजी पर आधारित होती जा रही है। हमारे आसपास मनोरंजन के तमाम साधन भी हैं। इस संपन्नता के बावजूद कुछ लोग दिन-रात अपने दुख का रोना रोते रहते हैं। इसकी वजह है हमारी नकारात्मक सोच। अपने दुख से कम, दूसरों के सुख से हम ज्यादा दुखी होते हैं और यही हमारी परेशानी का सबसे बड़ा कारण भी है। मनोवैज्ञानिकों की मानें तो सकारात्मक सोच से आदमी के अंदर ऊर्जा आती है, मुश्किल वक्त भी कट जाता है। माना जीवन के प्रति सकारात्मक रुख रखना कठिन होता है, खासकर तब जब आपके आसपास का माहौल अनुकूल न हो, लेकिन प्रयास से हर असंभव कार्य को संभव किया जा सकता है। बस जरूरत है, तो इच्छाशक्ति की। सकारात्मक सोच एक ऐसा सरल सूत्र है, जिसे जिंदगी में शामिल करके खुशी-खुशी जिया जा सकता है। कवि जयशंकर प्रसाद ने अपने महाकाव्य ′कामायनी′ में यही संदेश दिया है, ′औरों को हंसते देखो मनु, हंसो और सुख पाओ, अपने सुख को विस्मृत कर लो, सबको सुखी बनाओ।

सकारात्मक बदलाव के लिए प्रकृति से जुड़ें। ऐसी किताबें पढ़ें, जो आपको प्रेरित करें और आपका उत्‍साह बढ़ाएं। अपने मस्‍तिष्‍क को नियमित रूप से सकारात्‍मक और प्रेरणादाई सामग्रियों की खुराक दें। जितना आप सकारात्‍मक माहौल में समय बिताएंगे, उतना ही आपके लिए बेहतर रहेगा। इसलिए पॉजिटिव थिंकिंग वाले लोगों के साथ रहें। जिस व्यक्ति का काम आपको अच्छा लगे, उससे प्रेरणा लें। हर किसी में अच्छी बातें तलाशें और जिनसे आप प्रभावित हों, उन्‍हें अपने जीवन में अपनाएं।

खुद को स्‍वीकारें

क्या आप अपने प्रति ईमानदार हैं। अगर हां, तो आप जैसे हैं, वैसे ही खुद को स्‍वीकारें। किसी की नकल करने या किसी के जैसा बनने का प्रयास न करें। अपने आपसे प्रेम करें और अपने निर्णय अपनी पूरी सामर्थ्‍य और समझदारी से लें। दूसरे लोगों को प्रसन्‍न करने का प्रयास न करें। अपनी पिछली गलतियों से सीख लेते हुए स्‍वयं में सुधार करने का लगातार प्रयास करते रहें। किसी भी समस्‍या से जूझने के बजाय उसका उपाय खोजें।

बदलाव से ना घबराएं

मानसिक रूप से मजबूत लोग किसी भी नई शुरुआत का स्वागत करते हैं। बदलाव से डरते नहीं हैं। उनको डर एक जगह बने रहने से लगता है। बदलाव उन्हें कार्य करने की ऊर्जा देता है। वे बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। योजना बनाकर अनुमानित जोखिम लेने में यकीन करते हैं। आप जितनी जल्‍दी यह स्‍वीकार कर लें कि परिवर्तन सर्वमान्‍य सत्‍य है, आपके लिए उतना ही अच्‍छा रहेगा, अन्यथा अवसादग्रस्‍त होकर आपके पास जो है, आप उसे भी गंवा सकते हैं। याद रखिये, आपको जीवन में हो रहे बदलावों के साथ सामंजस्‍य बिठाते हुए आगे बढ़ना है।

लक्ष्‍य बनाएं

अधिकतर लोग अपने जीवन में कोई लक्ष्‍य ही नहीं बनाते हैं। उन्‍हें पता ही नहीं होता कि वे क्‍या करना चाहते हैं और उन्‍हें कहां पहुंचना है। इसलिए जरूरी है कि अपना लक्ष्‍य निर्धारित करें। छोटे-छोटे लक्ष्‍य बनाएं, उन्‍हें पूरा करने के लिए अपनी पूरी शक्‍ति लगा दें। ये छोटे-छोटे लक्ष्‍य आपके लिए मील का पत्‍थर साबित होंगे और आपकाे आपके अंतिम लक्ष्‍य तक पहुंचा देंगे। लेकिन लक्ष्‍य स्‍थापित करने से पहले तीन चीजों का ध्‍यान रखें- वे वास्‍तविक हों, प्राप्‍त करने योग्‍य हों, उनके लिए समय निर्धारित करें।

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इसी के साथ जरूरी है जीवन में धैर्य यानी सब्र। धैर्य की कमी से न केवल काम खराब होते हैं, बल्कि मेहनत भी जाया होती है। धैर्य में कमी के कारण हम कई फैसले गलत ले लेते हैं। इससे न केवल जीवन में गलतफहमियां पैदा होती हैं, बल्कि बने-बनाए काम भी बिगड़ जाते हैं। ऐसे में धैर्य आपके लिए बहुत जरूरी है।

अपनाएं जीवन जीने का सही सिद्धांत

खुशहाल जिंदगी जीने का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जीवन में आने वाली असफलताओं से सबक लेते हुए नए उत्साह के साथ आगे बढ़ना। जीवन में एक लक्ष्य निर्धारित कर उसे पाने के लिए हर अनुकूल आैर प्रतिकूल परिस्थितियों का निडरता से सामना करें, क्योंकि दृढ़इच्छा शक्ति और सही दिशा में प्रयास करने से किसी भी उद्देश्य या मुकाम को हासिल करना असंभव नहीं रह जाता। दूसरा और सबसे अहम सिद्धांत है कि विकट परिस्थितियों का हंस कर सामना करें। ऐसा करके देखिए, फिर आपको अपनी जिंदगी से कोई गिला-शिकवा नहीं रहेगा।

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  1. bhooshan das

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