पितृ पक्ष का महत्व - The Importance of Shradh in Hindi | पितृ पक्ष इन हिंदी

श्रद्धा दीजिये आप, समृद्धि देंगे पितृ – पितृ पक्ष का महत्व!

आज हम जहां पर हैं, वह हमारे पूर्वजों की मेहनत एवं प्रयास की ही देन है। ऐसे में पितृपक्ष के दौरान उनको यदि हम श्रद्धा दे पाएं, तो यह उनके लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि ही होगी। अगर संपूर्ण वर्ष के 15 दिन में भी सांसारिक मोहमाया का त्याग कर पितरों का स्मरण न कर सकें, तो हम कैसी संतानें हैं? घर, व्यापारिक स्थल या शुभ कार्यों की सफलता के लिए पितरों के प्रति सम्मान और उनका आशीर्वाद लेना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि पितृ तृप्ति के बिना देवता भी आशीर्वाद नहीं देते। वैसे भी प्रत्येक शुभ कार्य के प्रारंभ में माता-पिता, पूर्वजों को नमन तो हम करते ही हैं, तो फिर पितृपक्ष के 15 दिन उनको क्यों न समर्पित कर दें! पितृ पक्ष का महत्व | पितृ पक्ष का महत्व

Also Read: श्राद्ध कर्म विधि – पितृपक्ष में बिना आह्वान के आते हैं पितृदेव! पितृ पक्ष का महत्व | पितृ पक्ष का महत्व

श्रद्धापूर्वक करें श्राद्ध, समृद्ध होंगे आप… पितृ पक्ष का महत्व

पितृगण चंद्रमा के पृष्ठ भाग पर वास करते हैं, वे अत्यंत शक्तिशाली होते हैं, परंतु उन्हें जल उपलब्ध नहीं होता। ग्रंथों के प्रमाणानुसार श्राद्ध पक्ष आने पर वे अपने पुत्र-पौत्र व कुटुम्बियों से कामना करते हैं कि वे उन्हें जल प्रदान करेंगें, इस आशा में वे सूर्योदय से सूर्यास्त तक श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन अपने परिवार जनों के द्वार पर खड़े रहते हैं। एक अंजुलि जल यदि मंत्रपूर्वक, सविधि उन्हें दे दिया जाए, तो उनसे वे एक वर्ष तक तृप्त रहते हैं और आशीर्वाद देकर, प्रसन्न होकर प्रस्थान करते हैं, जिसके फलस्वरूप घर में सभी लोगों के मंगल कार्य संपन्न होने लगते हैं। पितृ पक्ष का महत्व | पितृ पक्ष का महत्व

लोक व्यवहार में मनुष्य एकाग्र चित्त होकर श्राद्धपक्ष में पितरों के प्रति समर्पित हो सकें, इसलिए इस काल में सांसारिक कामों से दूर रहने की बात कही गई है। मगर यह कहीं उल्लेख नहीं मिलता कि पितृपक्ष में खरीदारी करना चाहिए या नहीं। इस पक्ष में गणेश आराधना और देवी आराधना उत्सव मनाए जाते हैं और लोग खरीदारी करते हैं। शायद इसी वजह से इस दौरान खरीदारी करना न केवल शुभ व बल्कि फलदायी माना गया है बल्कि ऐसी मान्यता भी है कि पितरों के सान्निध्य में किसी वस्तु की खरीदारी की जाए, तो इसमें उनका आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। हां, यह जरूर है कि पूरे साल के 365 दिनों में मात्र 15 दिन ही पितरों को श्रद्धांजलि, पिंडदान आदि के लिए दिए गए हैं। मनुष्य एकाग्र चित्त होकर श्राद्धपक्ष में पितरों के प्रति समर्पित हो सके , इसलिए इस काल में सांसारिक कामों से दूर रहने की बात कही गई है। पर कोई शुभ कार्य करने या नई चीज की खरीदारी वर्जित नहीं है। पितृ पक्ष का महत्व | पितृ पक्ष का महत्व

Also Read:  सभी पितरों को तृप्त कर विदा करने की अंतिम तिथि है सर्व पितृ अमावस्या (महालया) | पितृ पक्ष का महत्व

भारतीय परंपरा में तीन ऋणों (ऋषि ऋण, देव ऋण, और पितृ ऋण) से मुक्त होने को मनुष्य का कर्तव्य कहा गया है, अत: साल में कम से कम 15 दिन ही सही, पितरों के प्रति श्रद्धाभाव से पितृयज्ञ करना चाहिए। हमारे पितृ जब हमारे घर से खुश होकर अपने धाम को जाएंगें, तो ऐसा आशीर्वाद देकर जाएंगें, जिसे आप देख तो नहीं सकेंगें, परंतु महसूस जरूर करेंगे। श्राद्ध के दिन जिन कार्यों की मनाही है, उनका ध्यान रखना भी जरूरी है, अन्यथा विफलता का भी भय रहता है। पितृ पक्ष का महत्व | पितृ पक्ष का महत्व

Image Courtesy: Dil Se Deshiपितृ पक्ष का महत्व | पितृ पक्ष का महत्व

Leave your vote

0 points
Upvote Downvote

Comments

0 comments

Reply

Log in

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy