पीपल के पेड़ का आध्यात्मिक महत्व – आखिर क्यों की जाती है पीपल के पेड़ की पूजा?

पीपल को प्रत्यक्ष देवता कहा गया है। माना जाता है कि इस वृक्ष के पास दिव्य चेतना होती है। गीता में श्रीकृष्ण तो यहां तक कहते हैं कि समस्त वृक्षों में पीपल का वृक्ष उन्हीं का स्वरुप है। इस वृक्ष के पर्यावरण और औषधीय उपयोगों के बारे में भी लोगों की अलग-अलग राय हैं। वे सभी सम्मतियां पीपल के महत्व को ही बताती हैं, लेकिन देखा जाए तो पीपल का वास्तविक महत्व चिकित्सकीय कम, आध्यात्मिक ज्यादा है। पूरी तरह से तो नहीं, लेकिन पीपल का सान्निध्य व्यक्ति की आंतरिक संभावनाओं को विकसित करने में काफी सहायता करता है।

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लोकजीवन में व्याप्त प्रचलन भी इस तथ्य की पुष्टि करते हैं। देवी-देवताओं को मनाने या पूजने के लिए भी लोग पीपल के पास ही जाते हैं और भूत-प्रेतों को प्रसन्न करने के लिए भी पीपल की छाया में उसकी जड़ों को ही पूजते हैं। पीपल में ऐसे कुछ आध्यात्मिक तत्व हैं जो आंतरिक सामर्थ्य के लिए उत्प्रेरक का काम करते हैं। इन उत्प्रेरकों की पहचान और मीमांसा अभी बाकी है। शास्त्रीय मान्यता है कि पीपल की पूजा अर्चना से सभी देवता प्रसन्न होते हैं। पीपल वृक्ष की नित्य तीन बार परिक्रमा करने और जल चढ़ाने से दरिद्रता, दुख और दुर्भाग्य का विनाश होता है। पीपल के दर्शन और पूजन से दीर्घायु तथा समृद्धि प्राप्त होती है।

पीपल का वृक्ष आध्यात्म की दृष्टि से उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि किसी व्यक्ति के लिए सांस लेना। इस मान्यता के पीछे एक कारण यह भी बताया जाता है कि इस वृक्ष के स्वरूप में सत्वगुण की प्रधानता है। दूसरे वृक्षों के फल किसी न किसी तरह का खट्टा-मीठा स्वाद लिए रहते हैं, लेकिन पीपल के फल और पत्ते स्वादहीन होते हैं और औषधीय गुणों से भरपूर भी। पीपल वृक्ष के फल, पत्ते, लकड़ी और छाल आदि को कूटपीट या पीस कर जो दवाएं बनाई जाती हैं, वे उनसे किए गए यज्ञ, अग्निहोत्र आदि कर्मों की तुलना में ज्यादा उपयोगी होती हैं। शाक्त, शैव और वैष्णव प्रकार के यज्ञों में समिधा और आहुति के लिए जितनी औषधियों का उपयोग किया जाता है, उनमें पीपल का वर्चस्व ही ज्यादा है।

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पीपल के अलावा वटवृक्ष (बरगद) को भी आध्यात्मिक दृष्टि से उत्कृष्ट माना गया है, लेकिन उसके विस्तार और विपुल वैभव को अन्यान्य कारणों से पीपल की श्रेणी से अलग ही रखा गया है। आप्तवचनों में वटवृक्ष को ऋषि की संज्ञा तो दी गई है, लेकिन ईश्वर के साकार रूप की बात जहां भी चली, सदा पीपल को ही याद किया गया।

Image Courtesy: Pixabay.

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