श्राद्ध का अर्थ हिंदी में - The Importance of Shradh in Hindi | Pitru Paksha Hindi

पितरों को संतृप्त करता है श्राद्ध – जानें श्राद्ध पक्ष का अर्थ और महत्व!

“श्रद्धया पितृन् उद्दिश्य विधिना क्रियते यत्कर्म तत् श्राद्धम्।” अर्थात् श्रद्धापूर्वक पितरों की संतुष्टि के उद्देश्य से जो कर्म किया जाता है, वह श्राद्ध कहलाता है। या यों कहें, वंश की परंपरा, वंश के प्रति कर्तव्य और उपादान ही श्राद्ध कर्म है। श्राद्ध पितरों को आहार पहुंचाने का उचित माध्यम है। यानी पितृ पक्ष के दौरान पितृ कुल के पूर्वजों के निमित्त, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए श्रद्धापूर्वक जो कुछ भी अर्पित किया जाता है, वह श्राद्ध है। | श्राद्ध का अर्थ | श्राद्ध का अर्थ

आप कहीं भी हों, किसी भी परिस्थिति से दो-चार हो रहे हों, इसमें पूर्वजों को विस्मृत नहीं करना चाहिए। श्राद्ध के लिए तन-मन और भावना की जरूरत है, धन की नहीं। पितरों के प्रति मन में श्रद्धा होनी चाहिए। ऐसी मान्यता है कि पितरों की शांति न होने पर परिवार में पितृदोष उत्पन्न होता है। पितृदोष से अनेक प्रकार की व्याधियां तथा अशांति होती हैं। इसीलिए श्राद्ध कर पितरों को तृप्त जरूर किया जाना चाहिए। | श्राद्ध का अर्थ

श्राद्ध का अर्थ | श्राद्ध पक्ष में ही श्राद्ध क्यों? | श्राद्ध का अर्थ

श्राद्ध पक्ष में सूर्य के दक्षिणायन होने के कारण ही इसे पितरों का समय माना जाता है। सूर्य देवता इस समय पितृ आत्माओं को मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करवाते हैं। इसलिए प्रतिवर्ष आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से अमावस्या तक श्राद्ध कर्म किया जाता है। इसमें खास बात यह है कि पितृ पक्ष में सूर्य के महत्व को ध्यान में रखते हुए पितरों को किया जाने वाला तर्पण सुबह 10 बजे तक ही किया जाना चाहिए। इसके बाद किया जाने वाला तर्पण फलदायी नहीं माना जाता है। | श्राद्ध का अर्थ

श्राद्ध का अर्थ | महिलाओं को नहीं है श्राद्ध का अधिकार! | श्राद्ध का अर्थ

शास्त्रों में केवल पुरुषों को ही श्राद्ध करने का अधिकार दिया गया है। शास्त्रों में इसका कारण दिया गया है कि पितृ हमेशा पुरुष रूप में ही होते हैं। यदि किसी महिला की मृत्यु हो जाती है, तो वह भी देह त्यागने के बाद पुरुष योनि में ही आ जाती है। यानी पितृ केवल पुरुषों की ही योनि में माने गए हैं, इसलिए महिलाओं को श्राद्ध करना निषिद्ध बताया गया है। हां, किसी विशेष परिस्थिति में महिलाएं किसी और से श्राद्ध कर्म करवा सकती हैं। | श्राद्ध का अर्थ

विकलांग प्रायश्चित करें!

यहां यह बात भी ध्यान रखने योग्य है कि विकलांगों द्वारा किया गया श्राद्ध भी पितरों द्वारा स्वीकृत नहीं किया जाता। यदि परिवार का मुखिया किसी भी तरह से विकलांग है, तो पहले उसे प्रायश्चित करना चाहिए। उसी के बाद श्राद्ध कर्म पूरे करने चाहिए। प्रायश्चित करने के लिए गाय को चारा व पक्षियों को दाना देना चाहिए। इसके बाद वे श्राद्ध संस्कार कर सकते हैं। | श्राद्ध का अर्थ

Image Courtesy: Nau Photos | श्राद्ध का अर्थ

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