श्राद्ध के नियम - पितृपक्ष में क्या करें और क्या न करें? | Do's and Don'ts of Shradh

श्राद्ध के नियम – पितृ पक्ष के दौरान क्या करें और क्या न करें?

श्राद्ध कर्म में शुद्धता औैर श्रद्धा को ज्यादा महत्व दिया गया है। इन नियमों को मानते हुए श्राद्ध कर्म की क्रिया को संपन्न करने से पितर प्रसन्न व तृप्त होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देकर अपने लोक चले जाते हैं। इसलिए श्राद्धकर्ता को नीचे बताई बातों पर जरूर गौर करना चाहिए: श्राद्ध के नियम

श्राद्ध के नियम | इन बातों का रखें विशेष ध्यान… | श्राद्ध के नियम

श्राद्ध कर्म में शुद्धीकरण का विशेष महत्व होता है। पितृपक्ष के दौरान श्राद्धकर्ता के लिए पूर्ण ब्रह्मचर्य, शुद्ध आचरण एवं पवित्र विचार आवश्यक माने गए हैं। अतः इनका ध्यान जरूर रखना चाहिए। श्राद्ध के नियम

शास्त्रों में श्राद्धकर्ता के लिए सात बातें निषिद्ध बताई गई हैं, जैसे- दंतधवन, ताम्बूल (पान आदि न खाए), तेलमर्दन, उपवास, स्त्री-संभोग, औषधि तथा परान्न भक्षण (दूसरे का भोजन न करे) ये सात बातें श्राद्धकर्ता के लिए वर्जित हैं। श्राद्ध के नियम

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श्राद्ध भोज के आठ नियम…

ग्रंथों में श्राद्ध भोक्ता के लिए भी कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। इनमें आठ स्थितियों को निषिद्ध बताया गया है, जैसे- पुन:भोजन (दुबारा भोजन न करें), यात्रा, भार ढोना, परिश्रम, मैथुन, दान, प्रतिग्रह तथा होम (चढ़ावा या आहुति), श्राद्धान्न भोजन करने वाले को इन आठ बातों से बचना चाहिए। श्राद्ध के नियम

श्राद्ध के नियम | लोहे के पात्र हैं निषेध… | श्राद्ध के नियम

सोने, चांदी, कांसे, तांबे के पात्र उत्तम हैं, मगर श्राद्ध में लोहे के पात्र का उपयोग कदापि नहीं करना चाहिए। लोहपात्र में न भोजन करना चाहिए और ना ही ब्राह्मण को उसमें भोजन कराना चाहिए। इनके अभाव में पत्तल उपयोग की जा सकती है, लेकिन केले के पत्ते पर श्राद्ध भोजन का निषिद्ध है। भोजनालय या पाकशाला में भी लोहे का बर्तन इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। आसन में लोहा किसी भी रूप में प्रयुक्त नहीं होना चाहिए। केवल शाक, फल आदि के काटने में लोहे का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि लोहे के दर्शन मात्र से पितर वापस लौट जाते हैं। श्राद्ध के नियम

कैसा होना चाहिए आसन?

श्राद्ध दो प्रकार का होता है, सपात्रक और अपात्रक। सपात्रक श्राद्ध में ब्राह्मणों को आसन पर बिठाया जाता है और श्राद्ध कर्म पूरे कराए जाते हैं। अपात्रक श्राद्ध में ब्राह्मणों के प्रतिनिधि के रूप में कुश (आसन) रखे जाते हैं। श्राद्ध के नियम

श्राद्ध के लिए रेशमी, कंबल, ऊन, लकड़ी, तृण, पर्ण, कुश आदि के आसन श्रेष्ठ हैं। पर चिता में बिछाए हुए, रास्ते में पड़े हुए, पितृ-तर्पण एवं ब्रह्मयज्ञ में उपयोग किए बिछौने, गंदगी से और आसन में से निकाले हुए, पिंडों के नीचे रखे हुए तथा अपवित्र कुश निषिद्ध माने गए हैं। इसका विशेष ध्यान रखें। श्राद्ध के नियम

श्राद्ध के नियम | गंध भी है वर्जित… | श्राद्ध के नियम

श्राद्ध में श्रीखंड, चंदन, खस, कर्पूर सहित सफेद चंदन ही पितृकार्य के लिए प्रशस्त हैं। कस्तूरी, रक्त-चंदन, गोरोचन, सल्लक तथा पूतिक आदि निषिद्ध हैं। श्राद्ध में कदंब, केवड़ा, मौलसिरी, बेलपत्र, करवीर, गहरे रंग के सभी फूल तथा उग्र गंधवाले और गंधरहित सभी फूल वर्जित माने गए हैं। इसके अलावा अग्नि पर दूषित गुग्गुल, गोंद का चूरा अथवा हवन में केवल घी डालना भी निषिद्ध है। श्राद्ध के नियम

योग्य ब्राह्मण को ही आमंत्रित करें…

श्राद्ध में पतित, नास्तिक, मूर्ख, धूर्त, मांस विक्रयी व्यापारी, कुनखी, काले दांतवाले, गुरु द्वेषी, शुल्क से पढ़ाने वाला, जुआरी, अंध, कुश्ती सिखाने वाला इत्यादि ब्राह्मणों को त्याग देना चाहिए। योग्य ब्राह्मणों को ही आमंत्रित करना चाहिए, तभी ब्राह्मण भोज का उचित फल प्राप्त होता है। श्राद्ध के नियम

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ऐसे अन्न का प्रयोग न करें…

  • जिसमें बाल और कीड़े पड़ गए हों। जिसे कुत्तों ने देख लिया हो, जो बासी एवं दुर्गंधित हो, ऐसी वस्तु का श्राद्ध में उपयोग न करें। श्राद्ध के नियम
  • बैंगन और शराब का भी त्याग करें। श्राद्ध के नियम | श्राद्ध के नियम
  • जिस अन्न पर पहने हुए वस्त्र की हवा लग जाए, वह भी श्राद्ध में वर्जित है। मसूर, अरहर, गाजर, कुम्हड़ा, गोल लौकी, बैंगन, शलजम, हींग, प्याज, लहसुन, काला नमक, काला जीरा, सिंघाड़ा, जामुन, पिप्पली, सुपारी, कुलथी, कैथ, महुआ, अलसी, पीली सरसों, चना आदि सब वस्तुएं श्राद्ध में वर्जित हैं। इसलिए इनका इस्तेमाल श्राद्ध के दौरान न करें।

मांस-मांसाहार है पूर्णतः निषेध…

श्राद्ध में मांस देने वाला व्यक्ति मानों चंदन की लकड़ी जलाकर उसका कोयला बेचता है। वह तो वैसा मूर्ख है जैसे कोई बालक अगाध कुएं में अपनी वस्तु डालकर फिर उसे पाने की इच्छा करता है। श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि न तो कभी मांस खाना चाहिए, न ही श्राद्ध में देना चाहिए। सात्विक अन्न-फलों से पितरों की सर्वोत्तम तृप्ति होती है। मनु का कहना है कि मांस न खाने वाले की सारी इच्छाएं पूर्ण हो जाती हैं। वह जो कुछ सोचता है, जो कुछ चाहता है, जो कुछ कहता है, सब सत्य हो जाता है। अत: श्राद्ध के महत्व को समझते हुए इन बातों को ध्यान में रख कर श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करना चाहिए। श्राद्ध के नियम | श्राद्ध के नियम

Image Courtesy: Dabangdadi | श्राद्ध के नियम

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