जैसी संगत, वैसी रंगत – जीवन में संगति का महत्व!

जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति का साथ हमारे अनुकूल ही हो। इच्छाओं के वश में आकर प्रतिकूल को अनुकूल बनाते-बनाते हमारी सारी ऊर्जा उसी में व्यय हो जाती है। तो फिर क्यों न हम अनुकूल वातावरण खोजें, ताकि हम अपनी मंजिल की ओर बढ़ सकें तेजी से।

डाइनिंग टेबल पर रखा था रेडियो। रेडियो पर लग रहा था एफएम चैनल। बज रहा था कोई अच्छा सा गीत। गीत के साथ जुड़ा अच्छा सा संगीत। इसी टेबल पर पड़ी थी कोई कटोरी। पास में रखा एक चम्मच। रेडियो पर बजते संगीत के साथ एकदम से कटोरी व चम्मच भी जोर-जोर से हिलने लग गए, जैसे कि कटोरी व चम्मच भी उस रेडियो के संगीत पर नाच रहे हों।

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नन्ही इरा ने यह देखा तो वह भी खुशी से झूम उठी। रेडियो के संगीत से बजती कटोरी और घनघनाता चम्मच। चम्म्च व कटोरी के घनघनाने से नाचती नन्ही इरा। ये सब चल रहा था कि पापाजी आ गए। इरा ने पापा से पूछा कि आखिर रेडियो के संगीत से कटोरी चम्मच क्यों नाच उठे? तब पापा ने भी चहकते हुए कहा, ‘हर एक व्यक्ति और वस्तु एक निश्चित वेवलेंथ (Wavelength) यानि तरंगदैर्ध्य से गति करता है। अगर उसकी वेवलेंथ के समान ही अन्य व्यक्ति या वस्तु की वेवलेंथ हो जाए, तो अन्य व्यक्ति या वस्तु भी पहली वस्तु या व्यक्ति के समान ही धड़कने लगते हैं।’ यह सब प्राणोदित कंपनों का चमत्कार है। प्राणोदित कंपन से रेडियो, चम्मच, कटोरी, इरा और उसके पापा भी झूम उठे। इस विशिष्ट वेवलेंथ अर्थात तंगरदैर्ध्य की आईए जांच करें!

यह जीवन की ऊर्जा में कैसे जगाती है आंच। विचारें, जांचें अपने आपको।

  • मैं किस वेवलेंथ से कितना धड़कता हूं?
  • मेरी धड़कन की वेवलेंथ किस-किसकी वेवलेंथ से मिलती है?
  • कौन सी धड़कन, कौन सी वेवलेंथ और कौन हैं मेरे वेवलेंथी व्यक्ति?
  • कौन हैं वे जिनकी प्रेरणा से मुझमें पैदा होता है कंपन?
  • मेरे प्राणोदित कंपन के साथी कौन-कौन हैं?
  • कौन हैं वे जिनकी प्रेरणा भर देती है, मुझमें अक्षय ऊर्जा?
  • मेरी प्रेरणा को बढ़ाने के मेरे पास क्या-क्या उपाय हैं?
  • ऐसी कौन-कौन सी वेवलेंथ हैं, जिनसे मैं धड़कने लग जाता हूं?

समान विचारधारा, समान तरंग दैर्ध्य, इक्वल वेवलेंथ से जो गति पैदा होती है उससे जीवन में संगीत पैदा होता है। जीवन में लाइव एनर्जी बनी रहती है। इसे संगत का असर भी कहते हैं। यही कहलाता है खरबूजे को देखकर खरबूजे का रंग बदलना।

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इसे कहते हैं एक रंग में रंग जाना। जैसे साधन और साध्य एक हो गए। जैसे राही और मंजिल एक हो गए। यह सब प्रेरणा का चमत्कार है। स्वयं भी प्रेरक बनिए और अपने प्रेरकों की प्रेरणा से जीवन में ऊर्जा को निमंत्रित करिए। समान वेवलेंथी साथियों को पहचानकर दिल से धड़किए। फिर देखिए कि लक्ष्य खुद चलकर आपके सामने कैसे आता है।

Image Courtesy: Pexels.

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