इस दशहरा कीजिए अपनी कमजोरियों के दशानन का दहन – Learn How to Win Yourself!

विजयदशमी यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व। दशानन यानी दस सिर वाला रावण १० बुराईयों और कमजोरियों का प्रतीक भी है, जिसका अंत करके ही तरक्की की राह पर आगे बढ़ा जा सकता है। देश और दुनिया में कामयाबी की राह पर आगे बढ़ने वाले इसी कारण अपनी पहचान बनाने में सफल होते हैं, क्योंकि वो अपने भीतर की कमजोरियों और दुर्गुणों पर विजय पा लेते हैं। ये कमजोरियां या दुर्गुण कमोबेश हम सभी में होते हैं, लेकिन इसके साथ जीने या इन पर आत्ममुग्ध होने के बजाय इनका संहार करना बेहद ज़रूरी है। तभी आप अपने लक्ष्य को पाने की दिशा में पूरे विश्वास के साथ अग्रसर हो सकते हैं। इसलिए अपने भीतर की दस कमजोरियों को पहचान कर आप भी इनका दहन करें और एक अच्छा इंसान बनने के साथ-साथ पढ़ाई, उद्यम या नौकरी में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करें।

क्या हैं ये दस कमजोरियां और कैसे पाएं इन पर विजय, आईये जानें!

क्रोध

हम सभी के भीतर क्रोध नामक कमजोरी होती है। चीज़ों के अनुरूप न होने पर यह क्रोध उभर आता है। कभी-कभी तो यह बेहद उग्र रूप भी धारण कर लेता है। क्रोध में हम सुध-बुध भूलकर अक्सर ऐसा व्यव्हार कर बैठते हैं, जो दूसरों को आहत करने के साथ-साथ हमें भी हानि पहुंचाता है। गुस्सा ठंडा होने पर हमें इसका पछतावा भी होता है, लेकिन क्रोध के कारण हुए नुकसान की भरपाई नहीं हो पाती। इस क्षति से बचने का तरीका सिर्फ यही है कि आप अपने क्रोध पर काबू पाएं। हर परिस्थिति में खुद को शांत-संयत रखने की आदत डालें, ताकि आप क्रोध के कोप से बच सकें।

घमंड (अहंकार)

पढ़ाई में अच्छा, सुन्दर, पैसे वाला, दूसरों से ज़्यादा काबिल, शक्तिशाली या बड़े पद वाला होने की स्थिति में अक्सर हमारे भीतर घमंड घर बना लेता है। इसका नतीजा यह होता है कि हम इंसानियत भूलकर दूसरों को कमतर समझते हुए उनका अपमान कर बैठते हैं। इस घमंड के कारण लोग हमसे दूर होते जाते हैं। जब लोग आपसे जुड़ेंगे ही नहीं, तो आपकी उपलब्धियों का कोई मतलब नहीं होगा। जिस तरह वृक्ष जितना बड़ा और फलदार होता है, उसी तरह आपका बड़प्पन भी इसी में है कि आप किसी भी उपलब्धि पर घमंड करने के बजाय विनम्र बनें।

आलस

आप बड़े-बड़े सपने तो देखते हैं, लेकिन वे लक्ष्य और कामयाबी में इसलिए नहीं तब्दील हो पाते, क्योंकि आप उन्हें पाने के लिए आवश्यक प्रयास ही नहीं कर पाते। ऐसा सिर्फ इसलिए होता है, क्योंकि आप आलस से उबर नहीं पाते। आपको लगता है कि अभी तो बहुत समय पड़ा है। जल्दी क्या है। कल कर लेंगे। कामयाबी की राह में सबसे बड़ी बाधा आलस है। इसलिए कर्मठ बनें और इस उक्ति पर विचार करते हुए आगे बढ़ें कि, ‘काल करे सो आज कर, आज करे सो अब’। मनुष्य का जीवन बार-बार नहीं मिलने वाला, इसलिए कर्मठता के साथ इसका भरपूर सदुपयोग करें और समय ना गवाएं।

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डर

आप किसी काम को करने या किसी योजना पर अमल करने से इसलिए डरते हैं, क्योंकि आपको खुद पर भरोसा नहीं है, क्योंकि आपने खुद को इसके लिए तैयार नहीं किया है। अपनी योग्यता को आवश्यक स्तर तक नहीं बढ़ाया है। ध्यान रखें, अगर आप किसी लक्ष्य को पाना चाहते हैं और उसके लिए सपने देखते हैं, तो उसके लिए खुद को तैयार करें। लक्ष्य चाहे जितना ही बड़ा क्यों न हो, उससे डरें नहीं। साहसी बनें।

कटु वचन और झूठ

किसी के शारीरिक चोट पहुंचाने से होने वाला घाव तो भर जाता है, लेकिन कड़वे बोल की चोट शायद कभी नहीं भरती। इस बात का एहसास कभी न कभी हर किसी को होता है। जब हम खुद किसी की कड़वी बात नहीं पचा पाते, तो ज़रा सोचिए अगर हम दूसरों से भी वैसा ही बोलें तो उन्हें कैसा लगेगा। इसलिए कभी किसी की कोई बात या काम ख़राब भी लगे, तो उसे उल्टी-सीधी सुनाने के बजाय उसे समझाएं ताकि वह आगे से ऐसा न करे।

इसके अलावा, आजकल लोग बात-बात पर झूठ बोलने से परहेज नहीं करते। वे परवाह नहीं करते कि जब इस झूठ का पर्दाफाश होगा, तो उनकी छवि कितनी ख़राब होगी। अगर झूठ बोलना हमारी आदत में शुमार हो जाता है, तो इससे हमारी छवि ख़राब होती है। इस आदत की वजह से हमें शर्मसार भी होना पड़ सकता है। इसलिए हमेशा सच के साथ रहें। सच बोलने से कभी-कभार तात्कालिक तौर पर कष्ट हो सकता है, लेकिन इससे आपकी छवि कतई ख़राब नहीं होगी और लोग आप पर भरोसा करेंगे।

अधैर्य

आज चाहे हमने जितनी भी तरक्की क्यों न कर ली हो, तकनीकी में काफी आगे बढ़ गए हों, इसके बावजूद हम सभी में संयम की कमी होती जा रही है। छोटी-छोटी बातों पर हम अपना धैर्य खो देते हैं और कुछ भी प्रतिक्रिया कर बैठते हैं, बिना सोचे-समझे कि इसका नतीजा क्या होगा। यह असंयम फेसबुक, व्हाट्सएप्प, इंस्टाग्राम, जैसी सोशल साइट्स पर भी देखने को मिलता है। अपने अधैर्य पर नियंत्रण पाते हुए हमें अपने दिलो-दिमाग को शांत रखने का प्रयास करना चाहिए।

गैर-जिम्मेदारी

हमारा ज्ञान चाहे जितना बढ़ गया हो, पर हममें से तमाम लोग जिम्मेदारी लेने से पीछे हटते है। इसका नतीजा यह होता है कि ऐसे लोग लीडर की भूमिका में आगे नहीं आ पाते। इस आदत की वजह से उन्हें कोई महत्वपूर्ण कार्य भी नहीं सौंपा जाता। इसलिए अगर आप अपनी पहचान बनाना चाहते हैं, तो आगे बढ़कर न सिर्फ जिम्मेदारियां लें, बल्कि उन्हें पूरी कुशलता के साथ निभायें भी।

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बेईमानी

इससे अभिप्राय दूसरों को धोखा देने से है। आप स्टूडेंट हों या नौकरीपेशा या एक व्यवसायी, अगर आप अपना काम अच्छी नीयत से करते हैं, तभी लोग आपको अच्छी नज़रों से देखेंगे। बेईमानी से बचें और खुद को एक अच्छी नीयत वाला इंसान बनाने की कोशिश करें।

खुद को दूसरों से कमतर आंकना

बहुत सारे लोग खुद को अंडर-एस्टीमेट करते हैं यानी किसी भी काम या लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वे अपने आपको दूसरों से कमतर मानते हैं। वे यह मान लेते हैं कि उनसे तो वह काम होगा ही नहीं। यह न भूलें कि मुश्किल से मुश्किल काम भी कोई न कोई इंसान ही करता है। आप भी अगर कोई लक्ष्य तय करते हैं, तो खुद को कमतर समझने के बजाय उसे पाने के लिए ईमानदारी के साथ सही दिशा में मेहनत करें।

अति-आत्मविश्वास

किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए अपने आप पर आत्मविश्वास होना बेहद ज़रूरी है, लेकिन अगर यह अति-आत्मविश्वास यानि ओवर-कॉन्फिडेंस में बदल जाए, तो कई बार जीती हुई बाजी भी व्यक्ति हार जाता है। इसलिए कोई भी सफलता या उपलब्धि मिलने के बाद ओवर-कॉन्फिडेंस का शिकार होने से बचें।

Image: Zostrip.

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