पूर्व जन्म का लेखा-जोखा - A Very Heart Touching Emotional Story in Hindi

पूर्व जन्म का लेखा-जोखा – A Very Heart Touching Story of Two Friends!

बस स्टॉप पर बैठी सावित्री काफी देर से श्रद्धा के आने का इंतजार कर रही थी। आज कॉलेज में उनका प्रैक्टिकल का एग्जाम था। सावित्री बार-बार अपनी घड़ी की तरफ देख रही थी, तभी उसकी नजर सामने से आ रही श्रद्धा पर पड़ी। जो भागी-भागी उसकी तरफ आ रही थी। उसे अपनी ओर आते देख सावित्री उस पर झल्लाते हुए बोली, ‘क्यों सो गई थी क्या? मैं कब से बैठकर यहां पर तेरा इंतजार कर रही हूं और तू है कि….तेरे चक्कर में मैंने बस भी छोड़ दी।’

‘माफ कर यार वो….।’ अभी श्रद्धा कुछ आगे कहती कि सावित्री उसकी बातों को काटते हुए बोल पड़ती है, ‘अब रहने दे। ज्यादा सफाई देने की जरूरत नहीं है। चल जल्दी, नहीं तो एग्जाम छूट जाएगा। फिर देती रहना सफाई।’ कहते हुए सावित्री सामने से आ रही टैक्सी को रोकने का इशारा करती है। दोनों टैक्सी में जाकर बैठ जाती हैं। टैक्सी में बैठी सावित्री श्रद्धा के चेहरे की तरफ बार- बार देख रही थी। उसके चेहरे की चमक ही बता रही थी कि आज वह कुछ ज्यादा ही खुश है। सावित्री अपने आप को रोक नहीं पाई और उससे पूछ बैठी, ‘क्यों, क्या बात है? आज बहुत खुश नजर आ रही है।’ उसकी बात सुनकर श्रद्धा मुस्कराती है और अपने बैग में से एक लिफाफा निकालकर उसे देते हुए कहती है, ‘ये ले।’

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‘क्या है?’ सवित्री लिफाफा लेते हुए आश्चर्य से श्रद्धा से पूछती है। श्रद्धा प्यार से उसके सिर पर मारते हुए कहती है, ‘पहले खोल के तो देख, खुद-ब-खुद पता चल जाएगा।’ सावित्री ज्यों ही वह लिफाफा खोलती है, उसमें रखे हुए फोटो को देखकर उसके मुंह से एकाएक निकल पड़ता है,

‘वाह एकदम हीरो लग रहा है। वैसे यह है कौन?’

‘तेरे जीजाजी हैं’, श्रद्धा हंसते हुए कहती है।

‘मेरे जीजा जी…यानी तेरी शादी तय हो गई।’

‘हां’ श्रद्धा सिर हिलाते हुए कहती है। ‘और तू अब बता रही है। जाओ मैं तुमसे बात नहीं करती।’ कहते हुए सावित्री अपना मुंह दूसरी तरफ घुमा लेती है।

‘अरे यार! तू तो खामखां नाराज हो रही है। मैं तो बस स्टॉप पर ही बताने वाली थी, मगर तूने मुझे बताने का मौका ही नहीं दिया।’

‘चल ठीक है, ज्यादा पॉलिश मत मार। और बता कि मेरे जीजाजी करते क्या हैं?’ सावित्री कहती है।

‘अमेरिका में इंजीनियर हैं।’, श्रद्धा कहती है।

सावित्री चौंकते हुए, ‘अमेरिका में, अरे वाह! वाकई तू तो बहुत लक्की है। पैसा भी तो खूब ले रहे होंगे। चल अच्छा है। तू बड़े घराने से ताल्लुक जो रखती है। तुम्हारे लिए यह सब आसान है। जैसा चाहा वैसा वर ढूंढ़ लिया।’

श्रद्धा बोल पड़ी, ‘अब हमारे-तुम्हारे बीच में अमीरी-गरीबी की बात कहां से आ गई। रिश्ता इंसान थोड़े न बनाता है। जोड़ियां तो ऊपर वाला ही बनाता है। अगर तूने पूर्व जन्म में कोई पुण्य काम किया है, तो तुझे इस जन्म में जरूर एक अच्छा जीवनसाथी मिलेगा और मुझे पूर्ण विश्वास है कि तुम्हें भी तुम्हारे पसंद का जीवनसाथी जरूर मिलेगा। समझ़ी।’ फिर बातों ही बातों में कॉलेज आ जाता है। दोनों अपने क्लास रूम में चली जाती है।

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सावित्री घर आती है, तो पिताजी को कहते हुए सुनती है, ‘अरे सुनती हो, सावित्री की मां! मुंह मीठा कराओ बेटी की शादी तय कर दी।’ सावित्री की मां अंदर घर में बर्तन धो रही थीं। बेटी की शादी की बात सुनकर सब कुछ छोड़ कर खुशी से भागी-भागी बाहर बरामदे में आती हैं और उनसे पूछ पड़ती है, ‘लड़का क्या करता है?’ ‘लड़का कोई नौकरी नहीं करता, लेकिन हां वह बहुत कर्मठ है। घर का सारा काम-काज वही देखता है।’

पिताजी की बातें सुनकर सावित्री की आंखें भर आती है, लेकिन फिर भी चेहरे पर झूठी मुस्कान लिए वह घर के अंदर चली जाती है और अपने आप से कहती है, ‘शायद मैंने पूर्व जन्म में कोई पुण्य का काम न किया हो…’

Image Source: Sarita.

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