Leadership Skills in Hindi - लीडरशिप के गुण | कैसे करें नेतृत्व क्षमता का विकास?

लीडरशिप है आपकी सच्ची मंजिल – Be a Leader, Not a Sheep!

आखिर हम सब अपनी सच्ची मंजिल क्यों नहीं प्राप्त कर पाते? ऐसा इसलिए है क्योंकि जीवन के सफर में जो भी विचारधारा या अनुभव हमने कमाए हैं, वह हमारी सोचने-समझने की शक्ति को समाप्त कर देते हैं। इसीलिए बस हम एक क्रिया-प्रतिक्रिया की मशीन बनकर रह जाते हैं।

हम सब नेतृत्व करने के लिए ही बने हैं। ऐसा भी हो सकता है कि जिस समूह का आप नेतृत्व कर रहे हों, वह बहुत छोटा हो। हमारे नेतृत्व में बहुत कम लोग हो सकते हैं, लेकिन छोटे समूह का ही सही, आप नेतृत्व तो करते ही हैं। इस बात को समझने के लिए आप अपने आस-पास नजर दौड़ाकर लोगों का निरीक्षण कीजिए। आपको हर किसी में नेतृत्व क्षमता नजर आएगी। आपका चौकीदार, घर का नौकर सभी अपने-अपने क्षेत्र में नेतृत्व करते हैं। आपका घरेलू नौकर अपने घर में मुखिया है। खरीदारी, मोलभाव आदि करने के मामले में वही मुखिया रहता होगा। चौकीदार का भी ऐसा समूह होगा जिसमें सभी उसके सपनों में भागीदार होंगे। भले ही वह छोटे क्षेत्र में हो, लेकिन मुखिया तो है ही।

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हममें से हर कोई नेतृत्व क्षमता रखता है लेकिन अनुसरणकर्ता 5 भी हो सकते हैं, 50 भी और 5 हजार भी। सच तो यह है कि हम सभी नेतृत्व करते हैं। भले ही चेतन रूप से करें या अचेतन तौर पर या फिर आवश्यकता पड़ने पर। नेतृत्व क्षमता हर व्यक्ति में सांस लेने की क्षमता की तरह स्वाभाविक रूप से आती है, भले ही उसका प्रभाव क्षेत्र कम हो। आपने ध्यान दिया होगा कि जिस तरह आमतौर पर हमारी सांस लेने कि प्रक्रिया स्वास्थ्य कि दृष्टि से सही नहीं होती और हम सही ढंग से सांस लेना भूल जाते हैं, उसी तरह हम नेतृत्व क्षमता के होते हुए भी या तो उस पर विश्वास नहीं करते या फिर नेतृत्व करना ही भूल जाते हैं।

आमतौर पर हम जो अपने लिए चुनते हैं, वही हमारी मंजिल का निर्धारण करता है। हमारी जन्म की परिस्थितियों और अन्य अनिवार्य और अपरिहार्य घटनाओं से परे अपने जीवन के लिए जो हमने चुना, उससे हमारे भविष्य का निर्धारण होता है।

हम चाहें तो अपने निर्माता खुद बन सकते हैं। हम चाहें तो नेतृत्व करने वाले भी बन सकते हैं, क्योंकि यह क्षमता हमारे भीतर ही कहीं है। बस ज़रूरत है तो उसे पहचानकर विकसित करने की।

जैसे कि सबीर भाटिया की सच्ची कहानी है। केवल 250 डॉलर अमेरिका आए इस नवयुवक ने हॉटमेल नाम से सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की और कुछ ही दिनों में 122 लोगों की कंपनी का मालिक बन गया। वह कई वर्षों तक माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के प्रस्ताव के आगे नहीं झुका और उसने अपना एक अलग मुकाम बनाया। उसकी कंपनी के लोग हर एक निर्णय में अपने नेता के साथ थे। वह जानता था कि अपने राज्य के राजा बनने से कम कुछ भी स्वीकार करने में उसके साथ-साथ उसकी कंपनी के लोगों के प्रति भी विश्वासघात होगा।

अगर आप इस कहानी पर ध्यान देंगे, तो पाएंगे कि यह कहानी है एक ऐसे सपने की जिसे एक समूह के हर सदस्य ने अपना सपना मानकर साकार करने की कोशिश की। लेकिन शुरुआत में यह सपना देखा सबीर ने। हर कोई ऐसा ही सपना देखता है और उसे साकार भी करना चाहता है। इसका मतलब तो यही है कि नेतृत्व के लिए पहली शर्त है सपने देखना।

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नेतृत्व की दूसरी शर्त है अभिव्यक्ति और अवसर की ताक में कुलबुलाती सपने को साकार करने की क्षमता। जिसमें नेतृत्व की क्षमता होती है वह चुनौतियों से नहीं घबराता।

इतना ही नहीं नेतृत्व क्षमता वाले व्यक्ति के पास अवसरों की कमी नहीं होती। अगर किसी तरह एक रास्ता बंद भी हो जाता है, तो वह अपनी संघर्ष शक्ति से दूसरी राह खोल लेता है। नेतृत्व के लिए एक बहुत ज़रूरी चीज आवश्यक है वह है स्वतंत्रता और दृढ़ इच्छा।

अगर आप में यह है, तो आप भी अपने क्षेत्र में मुखिया बन सकते हैं। बस फर्क सिर्फ़ इतना है कि हर कोई सबीर जैसा चर्चित नहीं हो पाता और वह ज़रूरी भी नहीं!

Image Courtesy: Pexels.

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