Makar Sankranti Puja Vidhi in Hindi - मकर संक्रांति के दिन इस विधि से करें पूजा।

स्नान, दान और संस्कृति का विधान है मकर संक्रांति – इस विधि से करें पूजा!

हर साल माघ मास में मनाए जाने वाले मकर संक्रांति के त्यौहार का संबंध प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और कृषि से है। क्योंकि ये तीनों चीजें जीवन का आधार भी हैं, इसलिए इसे महापर्व का दर्जा दिया गया है। ज्योतिष के अनुसार सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है। व्यक्ति की जन्मकुंडली में सूर्य लग्न, नवम एवं दशम का नैसर्गिक कारक होता है। आरोग्य, साहस, नेतृत्व, राज्य लाभ, पैतृक संपत्ति, पिता का सुख, धर्म एवं कर्मक्षेत्र इत्यादि को प्रभावित करने वाला प्रमुख ग्रह भी यही है। सूर्य एक माह तक एक ही राशि में रहता है और इस अवधि में विभिन्न राशियों पर शुभाशुभ फल दिलाता है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर-संक्रांति कहलाता है। पुराणों में कहा गया है कि सूर्य के मकर राशि में होने से मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति की आत्मा भी मोक्ष को प्राप्त होती है। पदम पुराण के अनुसार मकर संक्रांति के दिन किया गया दान, जाप अक्षय फल देने वाला और पापनाशक होता है।

सूर्य देव से पाएं आशीर्वाद…

इस दिन प्रातःकाल तिल का उबटन लगाकर स्नान करें। फिर लाल रंग के वस्त्र धारण करें। इससे आत्मिक बल की प्राप्ति होती है। इसके बाद तांबे के पात्र में गुलाब की पंखुड़ियों और लाल चंदन मिश्रित जल भरकर सूर्य को मंत्रों का उच्चारण करते हुए अर्घ्य दें। सूर्य को प्रसन्न करने के लिए इस दिन दान में गेहूं, गुड़, देसी घी, लाल पुष्प, तांबा, तिल से बने पकवान, माणिक्य आदि दिया जा सकता है। साथ ही आदित्य हृदय स्रोत, सूर्याष्टक या सूर्य का बीज मंत्र का जाप भी करें। सूर्य मंत्र हैं - ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नमः अथवा ॐ घृणि सूर्याय नमः। इन दोनों मंत्रों में से किसी एक का जाप कम-से-कम एक माला (21 या 108 मनके) आज के दिन अवश्य करें।

तिल का है विशेष महत्व…

शास्त्रों के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो सूर्य देव के पुत्र होते हुए भी सूर्य से शत्रुभाव रखते हैं। अतः शनिदेव के घर में सूर्य की उपस्थिति के दौरान शनि उन्हें कष्ट न दें, इसलिए तिल का दान और सेवन मकर संक्रांति में किया जाता है। मान्यता यह भी है कि माघ मास में जो व्यक्ति रोजाना भगवान विष्णु की पूजा तिल से करता है, उसके सारे कष्ट दूर हो जाते हैं।

जरूर करें गंगा स्नान…

मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम प्रयाग में सभी देवी-देवता अपना स्वरूप बदलकर स्नान के लिए आते हैं। इसलिए यह दिन स्नान, तीर्थयात्रा, दान, जप एवं तप के लिए अति उत्तम माना गया है। इस दिन गंगा स्नान करने से सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। मकर संक्रांति में चावल, गुड़, उड़द, तिल आदि चीजों को खाने में शामिल किया जाता है, क्योंकि यह पौष्टिक होने के साथ ही शरीर को गर्म रखने वाले भी होते हैं। इस दिन ब्राह्मणों को अनाज, वस्त्र, ऊनी कपड़े, फल आदि दान करने से शारीरिक कष्टों से मुक्ति मिलती है। दीर्घायु एवं निरोगी रहने के लिए रोगी को इस दिन औषधि, तेल, आहार दान करना चाहिए।

Image Courtesy: Arun Bhat/paintedstork.com

Leave your vote

0 points
Upvote Downvote

Comments

0 comments

Reply

Ad Blocker Detected!

Refresh

Log in

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy