Mobile Tips and Tricks in Hindi - वायरस से कैसे सुरक्षित रखें अपना मोबाइल?

Safety Tips For Mobile Phone Users – इन 11 टिप्स से रखें अपना मोबाइल और भी सुरक्षित!

मोबाइल के हज़ारों फ़ायदे हैं। आप अपने दोस्तों और सगे सम्बन्धियों से हर वक्त जुड़े रह सकते हैं। अब तक हर वह काम जो लैपटॉप से हुआ करता था, अब वह मल्टीमीडिया मोबाइल से भी संभव हो गया है। पर क्या मोबाइल पूरी तरह सुरक्षित है? किस तरह के खतरे हो सकते हैं मोबाइल उपभोक्ताओं को? आईये डालें इस पर एक नज़र…

मोबाइल वायरस…

मोबाइल वायरस एक बड़ी चुनौती है। ज़्यादातर मल्टीमीडिया फ़ोन मोबाइल वायरस का शिकार हो सकते हैं। वायरस कई तरह से मोबाइल को नुकसान पहुँचा सकते हैं। अगर आप किसी एप्लिकेशन का उपयोग करते हैं और उस एप्लिकेशन की सुरक्षा कोडिंग में कमी है, तो आपके मोबाइल का सारा डाटा चोरी किया जा सकता है। इसके अलावा वायरस ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी हमला कर आपके मोबाइल को नुकसान पहुँचा सकते हैं। यह ठीक उसी तरह होता है जैसे किसी डेस्कटॉप कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर या फिर ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ होता है। कई बार वायरस को मैसेज के रूप में भी भेजा जाता है। ऐसे मैसेज को खोलने भर से मोबाइल क्रैश तक हो सकता है।

ब्लूजैकिंग…

ब्लूटूथ एक ऐसी तकनीक है जिसके ज़रिए 10 मीटर की रेंज में ब्लूटूथ एनेबल्ड मोबाइल या कंप्यूटर से संपर्क स्थापित कर जानकारी का आदान-प्रदान किया जाता है। बिना किसी नाम के, ब्लूटूथ के ज़रिए अनचाहे अश्लील संदेश किसी के लैपटॉप या मोबाइल पर भेजना ब्लूजैकिंग कहलाता है। आम तौर पर यह एक वायरस के ज़रिए होता है जो आपकी फ़ोन बुक में एक नया कॉन्टैक्ट जोड़ देता है। फिर आस-पास जितने भी ब्लूटूथ एनेबल्ड मोबाइल या कंप्यूटर होते हैं, यह उन पर बिज़नेस कार्ड भेजता है। जैसे ही कोई इसे स्वीकारता है, यह कॉन्टैक्ट उसकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में भी जुड़ जाता है। हालांकि ब्लूजैकिंग से डाटा की चोरी नहीं हो सकती पर अगर ब्लूजैकिंग को अश्लील संदेश या विज्ञापन भेजने के लिए उपयोग किया जाये जो यह एक सिरदर्द बन सकता है। इससे बचने का उपाय बहुत आसान है। बस अपना ब्लूटूथ डिसेबल कर दीजिए और आप ब्लूजैकिंग से सुरक्षित हो जायेंगे।

ब्लू स्नार्फिंग…

ब्लू स्नार्फिंग भी एक ऐसी तकनीक है जो ब्लूटूथ के ज़रिए ही काम करती है। जैसे कि अगर आपका मोबाइल आपके लैपटॉप के साथ सिंक्ड है तो आपके मोबाइल की सारी जानकारी (तस्वीरें, मैसेज, कॉन्टैक्ट और वीडियो आदि) बिना आपके कुछ करे, आपके लैपटॉप पर सुरक्षित हो जायेगी। पर अगर यही जानकारी किसी अनचाहे कंप्यूटर से सिंक हो जाये तो उसे ब्लू स्नार्फिंग कहते हैं।

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यह ज़्यादातर उनके साथ ही होता है जो ब्लूटूथ हैंडसेट या मोबाइल से जुड़े अन्य ब्लूटूथ गैजटों का उपयोग लगातार करते हैं। इससे बचने के लिए हमे अपने ब्लूटूथ को “Undiscoverable” मोड में रखना चाहिए। ऐसा करने से हमारा मोबाइल उन ब्लूटूथ गैजटों से जुड़ा रहेगा जिनसे हम चाहते हैं और बाकी के ब्लूटूथ डिवाइस हमारे मोबाइल को ब्लूटूथ नेटवर्क पर नहीं ढूँढ पायेंगे।

वाई-फ़ाई – खतरे में हैं गुप्त जानकारियाँ…

वायरलेस लेन या जिसे हम वाई-फ़ाई भी कहते हैं, गुप्त जानकारियाँ चोरी करने का एक खतरनाक माध्यम भी हो सकता है। इन वायरलेस सिग्नल की रेंज बहुत अधिक नहीं होती। किसी एक घर या दफ्तर या हॉल में यह काम करता है। पर इस वाई फ़ाई नेटवर्क में अवैध तरीके से घुसना बहुत आसान है। अगर उपयुक्त सुरक्षा नहीं बरती गई है और एक बार कोई इस वाई-फ़ाई नेटवर्क में घुस गया तो फिर इस नेटवर्क के माध्यम से जितनी भी जानकारियों का आदान-प्रदान हो रहा है, वह साझा हो सकतीं हैं।

ई-मेल वायरस…

ज़्यादातर सभी स्मार्टफ़ोन वायरस के खतरे से ग्रसित होते हैं। आज हम सब ही अपने मेल स्मार्टफ़ोन पर ही देखना पसन्द करते हैं, पर ई-मेल्स के साथ कई बार कई वायरस भी जुड़े रहते हैं जो एक क्लिक भर करने से हमारे मोबाइल पर आ जाते हैं। इन्हें हम ट्रोजन भी कहते हैं। यह ट्रोजन हमारे स्मार्टफ़ोन पर मौजूद सभी एप्लिकेशन्स और डाटा को मिटा भी सकते हैं।

वॉर्म, स्पाइवेयर और ट्रोजन…

ब्लूटूथ आदान-प्रदान, इंफ्रारेड आदान-प्रदान या फिर एम.एम.एस. आदान प्रदान से वॉर्म, स्पाइवेयर या ट्रोजन एक मोबाइल से दूसरे मोबाइल तक की यात्रा बड़ी आसानी से कर लेते हैं। वॉर्म का काम होता है आपके मोबाइल को इतना धीरे कर देना की उस पर कोई काम न किया जा सके। इसको ठीक करने का एक ही इलाज बचता है कि मोबाइल फॉर्मेट कर दिया जाये। वहीं स्पाइवेयर आपके मोबाइल पर की गयी हर गतिविधि की जानकारी नेटवर्क पर डाल देता है या फिर उस शख्स तक पहुँचा देता है जिसने उसे प्रोग्राम किया है। इसके ज़रिए आपके पासवर्ड व अन्य गुप्त जानकारियाँ साझा की जा सकती हैं। ट्रोजन ज़्यादातर कोई ऐप या गेम इंस्टॉल करने पर उसके साथ मुफ्त में आ जाते हैं। यह गुप्त तरह से आपके मोबाइल से मैसेज आदि कर आपका बिल बढ़ा देते हैं।

कैसे सुरक्षित रखें अपना मोबाइल?

  • ब्लूटूथ और एम.एम.एस. इस्तेमाल करते वक्त खास सतर्कता बरतें। सिर्फ़ वही दस्तावेज़ स्वीकारें जो आप चाहते हों। हर आने वाले संदेश को न स्वीकारें। इसमें खतरनाक वॉर्म या ट्रोजन भी हो सकते हैं।
  • अपने ब्लूटूथ कनेक्शन को हमेशा इन्विज़िबल मोड में रखें जिससे कि वह और किसी को न दिखाई दे। जब तक आप न चाहें तब तक आने वाले किसी भी ब्लूटूथ कनेक्शन को मंज़ूरी न दें। फिर भी अगर बार-बार कनेक्शन की रिक्वेस्ट आये तो उस ब्लूटूथ ज़ोन से थोड़ा दूर चले जायें जिससे कि अपने आप ही कनेक्शन टूट जाये।
  • किसी भी अनजान या असुरक्षित स्त्रोत से कोई मैसेज, सॉफ्टवेयर या अन्य कंटेन्ट डाउनलोड न करें।
  • किसी भी अनजान व्यक्ति या नंबर से आये एम.एम.एस. को बिना खोले मिटा दें/नष्ट कर दें।
  • अपने मोबाइल के ऑपरेटिंग सिस्टम के नियमों को ध्यान से पढ़ें। खासतौर से ब्लूटूथ सेटिंग, इन्फ्रारेड सेटिंग, सुरक्षा एवं पिन कोड सेटिंग आदि को ज़रूर पढ़ें। इससे आपका मोबाइल खतरनाक प्रोग्राम से बचा रह सकेगा।
  • अपने मोबाइल पर एक पिन कोड ज़रूर डालें और इस पिन कोड को ऐसा रखें कि कोई और आसानी से न जान पाये। इससे आपके मोबाइल का कोई और अवैध उपयोग नहीं कर पायेगा।

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  • ऑपरेटर द्वारा दी गयी कॉल बारिंग, वेटिंग और फॉर्वर्डिंग तकनीकों का उपयोग ज़रूर करें जिससे कि कोई अन्य एप्लिकेशन इसकी सेटिंग खुद न बदल सके।
  • अपने मोबाइल को अपनी गोपनीय जानकारियाँ सुरक्षित रखने के लिए कभी उपयोग न करें। ऐसे में आपका मोबाइल अगर किसी अन्य अनजान व्यक्ति के हाथ लग गया तो आपको भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। खासकर बैंक पासवर्ड आदि न ही मोबाइल पर सुरक्षित रखें और न ही मोबाइल से उसका उपयोग करें।
  • हर मोबाइल का एक आई.एम.ई.आई. (International Mobile Equipment Identification Number) कोड होता है। इस कोड को संभाल कर रखें और ध्यान रहे कि यह आई.एम.ई.आई. कोड किसी और के हाथ न लग पाये वरना आपके मोबाइल की क्लोनिंग भी हो सकती है। इसके अलावा मोबाइल खो जाने पर आई.एम.ई.आई. कोड के ज़रिए मोबाइल ट्रेस भी किया जा सकता है।
  • अपने मोबाइल पर सुरक्षित सभी डाटा समय-समय पर किसी अन्य कंप्यूटर या लैपटॉप पर ट्रांसफर करते रहना चाहिए। जिससे कि आपका मोबाइल खो भी जाये जो डाटा सुरक्षित रह सके।
  • अपने ज्ञात ब्लूटूथ गैजटों के अलावा किसी अन्य गैजट से न जुड़ें। ज्ञात ब्लूटूथ गैजटों को पेयर कर के रखें जिससे बार-बार उनको जोड़ने की ज़रूरत न पड़े।

Image Credit: Pixabay.

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