11 New Year Resolution in Hindi - नए साल के संकल्प जो बदल देंगे आपकी लाइफ!

Happy New Year 2018 – नए साल में लें ये 11 नए संकल्प, बदल जाएगी आपकी लाइफ!

बीते साल में आपने क्या खोया और क्या पाया, इस बात का मंथन करने का अब समय नहीं है। जो बीत गया, सो बीत गया। वो कल था। अब तो आपको नए साल के साथ आने वाले कल के लिए एक नई शुरुआत करनी है। आइए इस साल हम अपनी जिंदगी को नए सिरे से आगे बढ़ाने का संकल्‍प लेंं। एक ऐसा संकल्‍प, जो आपकी जिंदगी को एक नई दिशा दे, आपको उत्साह से भर दे और सेहतमंद जीवन जीने के लिए प्रेरित करे।

सोच बदलें, खुश रहें…

घर हो, ऑफिस हो या स्कूल-कॉलेज, आपको किसी ने कुछ कह दिया या आपके साथ किसी ने कुछ बुरा कर दिया, तो यह जरूरी नहीं कि उसके साथ आप भी बुरा ही करें। कभी खुद को भी उसके स्‍थान पर रखकर सोचें कि आखिर उसने आपके साथ ऐसा क्यों किया? इसके पीछे क्या कारण रहे होंगे? उसकी क्या मजबूरी रही होगी? अगर आप ऐसा कर पाते हैं तो यह आपकी सकारात्मक सोच होगी। इसी से आप सही निर्णय ले पाएंगे और आपकी नाराजगी भी दूर हो जाएगी।

रिश्तों में ‘रिटर्न बैक पॉलिसी’ अपनाएं…

यह बात कभी न भूलें कि हमारे रिश्ते ‘रिटर्न बैक पॉलिसी’ की तरह होते हैं, जो मौका पड़ने पर आपके किए अच्छे व्यवहार के बदले आपका सहारा बनते हैं। आपके जीवन के खालीपन को भरते हैं और रोजाना के तनाव से आपको दूर रखते हैं। जिंदगी में खुश रहने के लिए दो स्तंभों, परिवार और दोस्तों, का मजबूत होना भी बहुत जरूरी है। संकल्प लें कि आप अपने दोस्‍तों, परिवार के लोगों और पड़ोस से रिश्ते बेहतर करने की कोशिश करेंगे।

अगर रिश्तों में कड़वाहट या गलतफहमियां हैं, तो उसे भी बातचीत से दूर करें। अपने परिवार के लिए पर्याप्त समय निकालें और हो सके तो सप्ताह के अंत में कहीं बाहर घूमने जाएं। दोस्तों से जब भी मौका मिले, फोन पर बात कर लें। ऑफिस में सहकर्मियों के प्रति सहयोगात्मक रवैया अपनाएं। पड़ाेसियों की छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करें। अगर आप ये सब बातें अपनाते हैं तो निश्चित रूप से आपके रिश्तों में मिठास आएगी।

‘माई वे, हाई वे’ की जिद छोड़ें…

हर जगह सिर्फ मेरी ही बात मानी जाए और जो मैं कहूं, उसी को सभी फॉलो करें, इस जिद आपको छोड़नी होगी। घर हो या ऑफिस, माई वे, हाई वे (My way or the Highway) वाला एटीट्यूड छोड़ दें, क्योंकि जरूरी नहीं कि हर बार आप ही सही हों। कभी-कभी दूसरों की राय भी लें, उनकी भी सुनें।

कुछ भूलें भी…

कहा जाता है कि शादी से पहले आंखें खुली रखें और शादी के बाद आंखें बंद कर लें। मतलब कि शादी से पहले आंखें खुली रखेंगे, तो सही जीवनसाथी चुनेंगे और अगर शादी हो ही गई है, तो जीवनसाथी को उसकी कमियों के साथ स्वीकार करें। उसकी कुछ गलतियों को इग्नोर करें। स्पष्ट है अगर आप अपने जीवनसाथी की खामियों को गिनने बैठेंगे, तो रिश्तों में कड़वाहट तो आएगी ही।

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ये न सोचें कि लोग क्या कहेंगे…

जीवन का सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग! जिंदगी को बोझिल बनाने के बजाय एन्जॉय करते हुए जिएं। शादी हो गई, बच्चे बड़े हो रहे हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अपनी जिंदगी जीना ही भूल जाएं। जिंदगी को अच्‍छी तरह से जीने के लिए आप कोई नया काम करें। कुछ नया करें और अच्छा करें। बरसों पहले आपके दिल में जो तमन्‍ना थी, उसे पूरा करें। नई भाषा, कुकिंग, डांसिंग या फिर तैराकी जैसे न जाने कितने हुनर आप सीख सकते हैं बशर्ते आप यह न सोचें कि लोग क्या कहेंगे। आप वहीं करें, जो आपका दिल कहे।

तन-मन को रखें स्वस्थ…

अच्‍छी सेहत ही जीवन की कुंजी है। बीते साल में आपकी सेहत चाहे जैसी भी रही हो, अपनी सेहत को बेहतर बनाने का संकल्प आप इस बार जरूर कर लें। खुद और परिवार के अन्य लोगों की हेल्‍थ के प्रति भी आप अलर्ट रहंगे, यह भी संकल्प लें। तन का ही नहीं, मन का भी ध्यान रखें। याद रखें अगर आप शरीर से पूरी तरह फिट हैं, लेकिन मन में शांति नहीं है, तो स्वस्‍थ तन को भी बीमार होते देर नहीं लगती। थोड़ा बहुत तनाव लेना ठीक है, पर ज्‍यादा तनाव लेने से अनिद्रा, तनाव, मोटापा, हृदय आदि से संबंधित बीमारियां होने लगती हैं। इसलिए आने वाले साल में खुश रहने की प्लानिंग करें। नियमित रूप से व्यायाम करें। मशीनों के बजाय हाथ से घर का काम निपटाएं। अच्‍छा खाना खाएं और भरपूर नींद लें। ऐसे लोगों के संपर्क में रहें, जो सकारात्मक विचारधारा के हों। प्रेरक किताबें पढ़ें। नियमित योग के साथ दिमागी कसरत वाले खेल खेलें, ताकि आपका ध्यान फिजूल की बातों पर न लगे।

अच्छे माता/पिता बनें..

आजकल हर पेरेंट्स यही चाहते हैं कि उनका बच्चा सफल बने। लेकिन इसके चक्कर में बच्चे को एक सही इंसान भी बनाना है, यह कभी न भूलें। इसके लिए उसके मन में सकारात्मक विचार, नैतिकता, अच्छे संस्कारों के बीज डालने का ध्यान जरूर रखें। बच्चा छोटा है और वह आपसे अपनी बात शेयर करने से डरता है, तो आपको पेरेंटिंग के अपने इस स्टाइल को बदलना होगा। अच्छी परवरिश का मतलब बच्चे को अपने इशारे पर नचाना नहीं, बल्कि उसके बालमन को समझना भी है। बच्चे को गाइड करने के नाम पर तानाशाही न बरतें। उनके व्यक्तित्व विकास में अपनी भूमिका तय करें। अगर आपका बच्चा बिगड़ रहा है या आपकी बात नहीं मानता है, तो उसे समझने की कोशिश करें। फुर्सत में अपने पालन-पोषण के तरीकों का मंथन करें। अगर कमी आप में है, तो पहले उसे सुधारें। सब कुछ अचानक भले ही न बदले, मगर थोड़े समय के बाद इसका अच्छा असर आपके बच्चे पर जरूर होगा।

खुद से करें प्यार…

हर कोई 100 % परफेक्ट नहीं होता। हर किसी में कुछ-न-कुछ कमी तो होती ही है। याद रखिए रंग रूप, कद-काठी, यह सब बाहरी चीजें हैं। असली व्यक्तित्व की रोशनी तो तभी नजर आती है, जब आपका मन, आपका स्वभाव भी चारों तरफ रोशनी फैलाए। इसलिए आपके अंदर जो भी कमी है, उसे स्वीकार करें और उसे दूर करने की कोशिश भी करें। खुद से प्यार करना इस दिशा में पहला कदम है।

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बुरी आदतों से करें तौबा…

बात-बात पर गुस्सा करना, किसी को अपशब्द बोलना, इस तरह की जो भी बुरी आदतें हैं, इस साल उन्हें दूर करने का भी एक संकल्प लें। इसी तरह से घंटों टीवी से चिपके रहना और हर हफ्ते शॉपिंग करना जैसी आदतों को भी धीरे-धीरे छोड़ने का प्लान करें। घर के किसी अन्य सदस्य में भी अगर ऐसी कोई लत हो, तो उसे छुड़ाने का प्रयास तो आप कर ही सकते हैं।

काम वही करें, जो आपके मन को भाए…

जिंदगी को लेकर आपने भी कुछ सपने संजोए होंगे। उन्हें सिर्फ सपनों तक ही सीमित न रहने दें। अपने सपनों को पूरा करने के लिए नए साल में जी जान से जुट जाएं। अपना आत्मविश्वास बढाने के लिए प्रेरक लेख और किताबें पढ़ें। अगर आप नौकरीपेशा हैं, तो अपने काम को ईमानदारी के साथ सही और प्रॉपर तरीके से करने का संकल्प लें। बेहतर प्रदर्शन के लिए अगर कुछ एक्‍स्ट्रा कोर्स करना चाहते हैं, तो वह भी कर सकते हैं।

आपके बड़ों ने आपको सिखाया, अब आप अपने बच्चों को भी सिखाईये…

अच्छे संस्कार और मूल्य आप ही से बच्चों को विरासत में मिलते हैं। जब आप घर-परिवार में एक-दूसरे का सम्मान करेंगे, तो बच्चे भी आपका सम्मान करना सीखेंगे और बाहर भी लोगों का आदर करेंगे। स्त्री-पुरुष के अलावा उनको हर किसी का सम्मान करना सिखाएं। बचपन से उनको लड़कियों का सम्मान करना सिखाएं। महज किताबी ज्ञान ही नहीं, बच्चों को नैतिक शिक्षा भी दें। तभी बच्चों में आप संस्कार डाल सकेंगे। याद रखें, बच्‍चों में इन गुणों को विकसित करने के लिए आपको खुद ही आदर्श स्‍थापित करने होंगे। और इन सब के साथ एक लक्ष्य आैर बनाएं – रोज किसी एक व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कुराहट लाने का, जैसे कि आप रोजाना एक गरीब बच्चे को खाना खिला सकते हैं।

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