Parenting in Hindi - स्मार्ट पैरेंटिंग टिप्स फॉर स्मार्ट जेनरेशन | Parenting Tips

कभी हमें भी तो समझो – बच्चों में परीक्षा का तनाव और पेरेंट्स की जिम्मेदारी!

माँ, जब भी देखो आप मुझे पढ़ने को कहती रहती हैं। आखिर मैं कब तक पढ़ता रहूँगा। दिन-रात पढ़ना मेरे वश में नहीं है। जब देखो, पढ़ो-पढ़ो और पढ़ो! आखिर हर वक्त पढ़ने का मन थोड़े ही न करता है। आखिर आपको यह बात कब समझ आएगी? कब आप कहोगी कि थोड़ी देर के लिए खेल भी लो? आप कब कहोगी कि थोड़ा विश्राम कर लो? आखिर कब आप मुझे समझोगी? आखिर आपको कब समझ आएगा कि हर वक्त पढ़ा नहीं जा सकता। आपको कब समझ आएगा कि पढ़ाई के बीच-बीच में थोड़ा विश्राम भी ज़रूरी है। परीक्षा को जिंदगी और मौत का सवाल बना दिया है आपने। मैं तो बहुत परेशान हो गया हूँ आपके व्यवहार से, कहते हुए दरवाज़े को ज़ोर से बंद करते हुए बाहर निकल जाता है, अंबरिश। parenting in hindi | parenting in hindi

अंदर से माँ की आवाज़ आती है। अरे! देखो जी, कैसे जुबान लड़ा रहा है मेरे से। बहुत जुबान चलने लगी है इसकी। क्या हमने उसे यही सिखाया है? बड़ों से कैसे बात की जाती है ये भी नहीं आता उसे। जमाना बहुत खराब हो चला है। हम भी तो बच्चे थे। हमने तो अपने माता-पिता से कभी ऐसे बात नहीं की। देखो…अब गुस्से में बाहर निकल गया है। कब लौटेगा, पता नहीं। बच्चों को पढ़ने को क्या कह दिया, सारा घर सिर पर उठा लिया है। न जाने कब समझ आएगी इन बच्चों को, कहते हुए उन्होंने दरवाजा बंद कर लिया। parenting in hindi | parenting in hindi

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Tips for Smart Parenting in Hindi

अंबरिश जैसे हज़ारों-हज़ार बच्चे रोज़ अपने माता-पिताओं से ऐसे सवाल पूछते होंगे? कितनों को जवाब मिल पाता होगा? क्या हर कोई दरवाज़े पर गुस्सा निकालकर इस तरह घर से बाहर निकल पाता होगा? क्या बच्चों को उनके वाजिब सवालों के जवाब मिलेंगे? या फिर माता-पिता इसी तरह से बच्चों को हमेशा अपना उदाहरण देकर शांत करने की कोशिश करते रहेंगे? क्या माता-पिता कभी बच्चों को समझ पाएँगे? उनकी भावनाओं को, उनकी ज़रूरतों को, उनके सवालों को? क्या पढ़ाई के साथ-साथ थोड़ा खेलना, और थोड़ा विश्राम ज़रूरी नहीं, जैसा अंबरिश अपनी माँ से कह रहा था? क्या अंबरिश के सवालों से उनकी माँ और ऐसे हज़ारों बच्चों के माता-पिता कभी अकेले में बैठकर जवाब खोजेंगे? अगर जवाब हाँ में है आता है, तो निश्चित रूप से बच्चों का भविष्य सुनहरा होगा। और अगर जवाब ना में आता है, तो उनको इस बारे में सोचना पड़ेगा। parenting in hindi | parenting in hindi

बच्चों में परीक्षा को लेकर कुछ तनाव तो होता ही है, अभिभावक भी इस तनाव का शिकार हो जाते हैं। कौन बच्चा फेल होना चाहेगा? वह भी अच्छे नंबरों से पास होना चाहेगा, ताकि उसे अच्छे स्कूल और कॉलेज-विश्वविद्यालय में दाखिला मिल सके। इसके लिए हर बच्चा अपनी तरफ से सबसे अच्छा करने का प्रयास करता है। इस समय बच्चों को माता-पिता का साथ चाहिए होता है। उसे ज्यादा प्यार-पुचकार की ज़रूरत होती है, क्योंकि इस समय वह बहुत कठिन डगर से गुजर रहा होता है। parenting in hindi | parenting in hindi

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इस दौरान बच्चा थोड़ा चिड़चिड़ा हो जाता है, क्योंकि उस पर परीक्षा का दबाव होता है। माता-पिता का फर्ज है कि बच्चे को उस दबाव से बाहर निकालें। उसकी मानसिक स्थिति को समझें। उसके अंदर चल रहे विचारों को समझें। उसे सहज करने का प्रयास करें। अपना स्नेह का हाथ, उनके सिर पर फेरें। उन्हेंं यह हौसला दें कि धीरे-धीरे और धैर्य से काम करने से हर मुश्किल का सामना किया जा सकता है। बच्चों को अपने अनुभव से पढ़ने का तरीका बताएँ। बीच-बीच में चाय, कॉफी, खेलने और विश्राम करने के लिए प्रेरित करें। बच्चा ज़्यादा तनाव में न चला जाए, इसलिए उससे बातचीत करते रहें। बच्चों को समय दें। प्यार से समझाएँ। बच्चे की तारीफ करें। देखिए, आपका बदला हुआ व्यवहार, आपके बच्चे में कैसे परिवर्तन लाता है। एक बार करके देखिए तो सही। parenting in hindi | parenting in hindi

Tips for Positive Parenting in Hindi

इसके अलावा माता-पिता अपने बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करते हैं। परीक्षा के समय या रिज़ल्ट के बाद इस तरह की तुलना किसी भी तरह से जायज नहीं कही जा सकती। यह बात सभी माता-पिताओं को समझनी होगी कि हर बच्चे का बौद्धिक स्तर अलग-अलग होता है। हर बच्चे की किसी भी काम को करने या समझने की क्षमता भी एक-दूसरे के विपरीत होती है। ऐसी स्थिति में जब कोई माता-पिता दूसरे बच्चों से अपने बच्चे की तुलना करते हैं, तो उनमें हीन भावना के आने की संभावना काफ़ी बढ़ जाती है। parenting in hindi | parenting in hindi

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अगर एक बार बच्चे के मन में हीन भावना घर कर जाए, तो उसे निकालना बहुत मुश्किल हो जाता है। तुलना से बच्चे माता-पिता से अंतर्मन और बाह्य दोनों ही रूप से दूर होते जाते हैं। माता-पिता को इस बात का भी विशेष ध्यान रखना है। इन सब बातों का यह मतलब यह नहीं कि बच्चे माता-पिता की कही बातों पर ध्यान न दें। इसका मतलब यह भी नहीं है कि बच्चे मन लगाकर न पढ़ें या अपनी मनमर्जी करें। बच्चे भी यह जानें कि माता-पिता किन परिस्थितियों मद्देनज़र उनकी पढ़ाई करवा करे हैं। किन विकट परिस्थितियों का सामना माता-पिता करते हैं, ताकि उनके बच्चों को पढ़ाई में परेशानी न हो। एक वक्त का खाना न खाकर भी माता-पिता बच्चों की फीस भरते हैं। वह कहते हैं कि यह तो उनका कर्तव्य है, तो क्या बच्चों का अपने माता-पिता के प्रति कोई फर्ज नहीं बनता? निश्चित रूप से बनता है। parenting in hindi | parenting in hindi

परीक्षा के समय यह आवश्यक है कि दोनों (माता-पिता और बच्चे) अपने कर्तव्य और फर्ज को निभाएं। माता-पिता बच्चों की भावनाओं को समझें और बच्चे अपने कर्तव्यबोध को। उन्हें वक्त की नज़ाकत को समझना होगा। बड़े होने के नाते माता-पिता की ज़िम्मेदारी निश्चित रूप से ज्यादा बनती है। क्या हम अंबरिश जैसे हज़ारों बच्चों को परीक्षा के तनाव में घर से बाहर जाने से रोक पाएँगे? देखिएगा कहीं…देर न हो जाए…। parenting in hindi | parenting in hindi | parenting in hindi

सलीके से गर बच्चों की परवरिश कर ली,
समझो आने वाली नस्लों की हिफाज़त कर ली।

Image Courtesy: Pixabayparenting in hindi | parenting in hindi

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