Pitru Paksha in Hindi - पितरों के श्राद्ध में इन तीन चीज़ों का रखें विशेष ध्यान !!

तर्पण, भोजन और त्याग – श्राद्ध में इन तीन चीज़ों का रखें विशेष ध्यान!

श्राद्ध के तीन अंग माने गए हैं – तर्पण, भोजन और त्याग। इसमें तर्पण को सबसे महत्वपूर्ण अंग माना गया है। जिसकी जितनी श्रद्धा हो, वह उतना भोजन बनाकर श्रद्धा से सबको भोजन कराए। तीसरा अंग है त्याग। इसी अंग के तहत श्राद्ध पक्ष में बनने वाले भोजन को छह भागों में विभाजित किया गया है। गाय, कौवा, बिल्ली, कुत्ता और ब्राह्मण को भोजन कराकर पितरों को खुश करने की बात शास्त्रों में लिखी गई है। माना जाता है कि पितरों के हिस्से के भोजन को इन्हीं भागों से उन तक पहुंचाया जाता है। अत: श्राद्ध संपन्न करते हुए इन बातों का भी ध्यान रखें। pitru paksha in hindi

pitru paksha in hindi | भोजन का पहला हिस्सा गाय को… | pitru paksha in hindi

ग्रंथों में गाय को परम पवित्र और पातालवासिनी माना गया है। गाय के संपूर्ण अंगों में परमात्मा निवास करते हैं। शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि गाय के जरिए बैकुंठ के दर्शन होते हैं। यही वैतरणी पार लगाती है। इसलिए श्राद्ध के दौरान गाय को भोजन कराने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनकी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। pitru paksha in hindi

भोजन का दूसरा हिस्सा कौवे को…

श्राद्धान्न में दूसरा हिस्सा कौवे को समर्पित है। श्राद्ध पक्ष में कौवे को महत्व देने के पीछे कारण यह है कि जब समुद्र मंथन हुआ था, तो कौवे ने अमृत पीकर अमरता प्राप्त कर ली थी। माना जाता है कि कौवे अच्छे-बुरे कर्मों के साक्षी होते हैं। ये परमात्मा तक हमारे कर्मों का लेखा-जोखा पहुंचाते हैं। इन्हें पितरों का संदेशवाहक माना जाता है। इसलिए इन्हें कराया गया भोजन पितरों तक पहुंचता है और उन्हें संतुष्टि मिलती है। pitru paksha in hindi

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भोजन का तीसरा हिस्सा बिल्ली को…

बिल्ली को लक्ष्मी का रूप माना जाता है। माना जाता है कि बिल्ली पितरों की फरियाद लेकर माता लक्ष्मी के पास जाती है। इससे भी पितरों की मुक्ति की राह आसान होती है। इसलिए भोजन का तीसरा हिस्सा बिल्ली को देने का विधान है। pitru paksha in hindi

कुत्तों को भी दें श्राद्धान्न…

कुत्ते को भी पितरों की मुक्ति के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। कहा जाता है कि जब पांडव स्वर्गारोहण के लिए निकले थे, तो धर्मराज युधिष्ठिर के साथ एक कुत्ता भी गया था। इसलिए कुत्ते को धर्म का प्रतीक कहा गया है। मान्यता है कि पितरों के भोजन का एक हिस्सा कुत्तों को खिलाने से भी पितृ प्रसन्न होते हैं। pitru paksha in hindi

ब्राह्मण भोज जरूर कराएं…

शास्त्रों में ब्राह्मण को गुरु के बराबर की पदवी दी गई है। इसलिए पितरों के मोक्ष के लिए ब्राह्मणों को भोजन कराने का महत्व सबसे अधिक बताया गया है। इसमें यह बात ध्यान रखी जानी चाहिए कि ब्राह्मण अच्छे कर्म-कांड करने वाला होना चाहिए। श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मण को हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ही भोजन कराना चाहिए और भोज के बाद यथाशक्ति दान करना चाहिए। pitru paksha in hindi

कुश औैर तिल का है विशेष महत्व…

भगवान विष्णु कहते हैं कि तिल मेरे पसीने से उत्पन्न हुए हैं। इसलिए तर्पण, दान और होम में दिए गये तिल का दान अक्षय होता है। एक तिल का दान स्वर्ण के बत्तीस सेर तिल के बराबर होता है। जबकि कुश मेरे शरीर के रोमों से उत्पन्न है। कुश (एक तरह की घास) के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्रभाग में शिव का वास है। इसलिए धार्मिक कार्यों में कुश भी बहुत शुभ है। pitru paksha in hindi

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pitru paksha in hindi | श्राद्ध की कुछ मुख्य बातें… | pitru paksha in hindi

  • पितृगण सदैव विश्वदेवों के साथ श्राद्धान्न ग्रहण करते हैं। ये विश्वदेव ही श्राद्ध का अन्न ग्रहण कर पितरों को संतृप्त करते हैं। दैहिक, दैविक और भौतिक संतापों को दूर करते हैं। pitru paksha in hindi
  • श्राद्ध न करने पर पितरों को पितृलोक में अन्न-जल के अभाव की पीड़ा सहन करनी पड़ती है, जिससे श्राद्ध न करने वाले वंशजों को भीषण समस्याओं का सामना करना पड़ता है। pitru paksha in hindi
  • श्राद्ध में जो अन्न पृथ्वी पर बिखेरा जाता है, उससे पिशाच-योनि तृप्त होती है। पृथ्वी पर जल डालने से वृक्षयोनि को प्राप्त हुए पितरों की तृप्ति होती है। pitru paksha in hindi
  • गंध और दीपक से देवत्व योनि को प्राप्त हुए पितरों की तृप्ति होती है। pitru paksha in hindi
  • हमारे अन्न, जल, तिल और वस्त्रों के दान करने से मनुष्य योनि को प्राप्त पितर संतृप्त होते हैं। pitru paksha in hindi
  • तिल को देवान्न कहा गया है। तिल ही वह पदार्थ है, जिससे पितृगण तृप्त होते हैं। इसलिए काले तिलों से श्राद्ध कर्म करना चाहिए। pitru paksha in hindi
  • यदि घर में कोई भोजन बनाने वाला न हो, तो फलों और मिष्ठान का दान कर सकते हैं। pitru paksha in hindi
  • अपने पितरों को श्राद्धान्न देने के बाद उनका स्मरण करते हुए इस मंत्र का तीन बार जाप करें: pitru paksha in hindi

ॐ देवताभ्य: पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नम: स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव भवन्तु ते।

Image Courtesy: Pixabay.| pitru paksha in hindi

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