जीवन में सफलता पाना चाहते हैं तो अपनाएं ये 13 सरल नियम!

अगर तमाम कोशिशों के बावजूद भी सफलता आपके हाथ नहीं आ रही, तो आपको ज़रूरत है स्वयं में कुछ बदलाव लाने की। नीचे दिए गए ये “13 सक्सेस मंत्र” अपनाकर आप जीवन के हर क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ सकते हैं।

कर्म की आदत को बढ़ावा दीजिए।

कर्म की आदत को बढ़ावा देने के लिए इन मुख्य बिंदुओं का अभ्यास कीजिए:
1. कर्मठ बनिये। काम टालने के बजाय काम करने वाला बनिये।
2. परिस्थितियों के अनुकूल होने का इंतज़ार मत कीजिए। वे कभी अनुकूल नहीं होतीं। जब भी बाधायें और कठिनाइयां आयें, उन्हें सुलझाने का तरीका खोजिए।
3. याद रखें, केवल विचारों से सफलता नहीं मिलती। विचारों का मूल्य तभी है, जब आप उन पर पूरी तरह से अमल करें।
4. डर भगाने और आत्मविश्वास हासिल करने के लिए कर्म कीजिए। जिस काम को करने में आपको सबसे अधिक डर लगता है, जानबूझकर उसी को कीजिए। निश्चित रूप से आपका डर भाग जाएगा।
5. अपने दिमाग़ को मानसिक रूप से जाग्रत रखिए। सही मूड बनने का इंतज़ार मत कीजिए। कर्म करना शुरू कर दीजिए और आपका मूड अपने आप सही हो जाएगा।
6. अभी काम शुरू कर दीजिए। “कल”, “अगले सप्ताह” या “बाद में”, इस तरह के शब्द असफलता के शब्द “कभी नहीं” के पर्यायवाची हैं। “हाँ, इस काम को अभी शुरू कर देता हूँ”, यह सोचकर तुरंत काम में जुट जाइए। किसी काम की तैयारी में समय बर्बाद करने के बजाय सीधे उस काम में लग जाइए।
7. पहल कीजिए, संघर्ष कीजिए, स्वयंसेवक बनिए। गेंद छीनकर गोल की तरफ दौड़ लगाइए। लोगों को ये साबित करके दिखाइए कि आपमें कर्म करने की योग्यता और महात्वाकांक्षा है।
8. अपने दिमाग़ को टॉप गियर में डालकर सफलता की राह पर चल पड़िये, और तब तक चलते रहिए जब तक कि आपको अपना लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए।

हार को जीत में बदलने के लिए यह पाँच सिद्धांत अमल में लाएं:
1.
असफलता का गहराई से अध्ययन करें, ताकि आप सफलता की राह पर आगे बढ़ सकें। जब भी आप हारें, तो उससे सबक़ लें और फिर पूरे मन से अगली बार जीतने की तैयारी में लग जाएं।
2. खुद के रचनात्मक आलोचक बनने का साहस रखें। अपनी ग़लतियाँ और कमज़ोरियाँ खोजकर उन्हें सुधारें। इससे आप प्रोफेशनल बन जायेंगे।
3. किस्मत को दोष देना बंद करें। हर असफलता का गहराई से विश्लेषण करें। यह पता लगायें कि ग़लती कहाँ हुई थी। याद रखें, तकदीर को दोष देने से कभी कोई आदमी वहाँ नहीं पहुँचा, जहाँ वह पहुँचना चाहता था।
4. लगनशीलता के साथ प्रयोगशीलता का समन्वय कर लें। एक ही तरह से काम करते रहने के बजाय नयी-नयी शैलियों का प्रयोग करें। प्रयोगशील और रचनात्मक बनें।
5. हर स्थिति का एक अच्छा (सकारात्मक) पहलू होता है। उसे खोजें, और एक बार फिर आप उत्साह से भर जाएंगे।

याद रखें, आप किसी भी परिस्थिति में वही देखते हैं, जो आप देखना चाहते हैं। जब आप एक स्पष्ट दृष्टि विकसित कर लेते हैं, तो सारी चीज़ें आपके लिए अच्छा काम करती हैं। मत भूलिए कि सफलता और असफलता में फ़र्क भी सिर्फ़ इसी बात से होता है कि असफलता, बाधा, निराशाजनक परिस्थितियों और हतोत्साहित करने वाली बातों के प्रति आपका रवैया क्या है!  इसलिए, हमेशा परिस्थिति के अच्छे पहलू को देखें और हार को जीत में बदलने का प्रयास करें।

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Image: searchengineland.

5 Comments

  1. Mr. Kuldeep Saini
  2. Pardeep
  3. lokesh dayre
  4. Pankaj yadav
  5. bhooshan das

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