Sarva Pitru Amavasya in Hindi - सर्व पितृ अमावस्या (महालया) का महत्व इन हिंदी

सभी पितरों को तृप्त कर विदा करने की अंतिम तिथि है सर्व पितृ अमावस्या (महालया)!

प्रत्येक मास की अमावस्या पितरों की पुण्य तिथि होती है, मगर आश्विन मास की अमावस्या पितरों के लिए परम फलदायी मानी गई है। इस अमावस्या को सर्व पितृ विसर्जनी अमावस्या अथवा महालया के नाम से भी जाना जाता है। जो व्यक्ति पितृपक्ष के पंद्रह दिनों तक श्राद्ध तर्पण आदि नहीं कर पाते अथवा जिन पितरों की मृत्यु तिथि याद न हो, उन सबके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, दान आदि इसी अमावस्या को किया जाता है। sarva pitru amavasya in hindi | sarva pitru amavasya in hindi

गरुड़ पुराण में कहा गया है कि अमावस्या के दिन पितृगण वायुरूप में घर के दरवाजे पर दस्तक देते हैं। वे अपने स्वजनों से श्राद्ध की इच्छा रखते हैं। उनसे अन्न और जल की अभिलाषा रखते हैं। उससे संतृप्त होना चाहते हैं। अगर उनको उचित श्रद्धा नहीं मिलती तो सूर्यास्त होने के बाद वे निराश होकर चले जाते हैं। अत: अमावस्या के दिन श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म करना चाहिए। यदि अमावस्या के दिन किसी पितर का श्राद्ध न भी पड़ता हो, तो भी श्राद्ध कर्म करना चाहिए। ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध अमावस्या के दिन संपन्न किया जा सकता है। नाम और गोत्र से अलग होकर भी श्राद्ध किया जा सकता है। sarva pitru amavasya in hindi | sarva pitru amavasya in hindi

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वैकल्पिक श्राद्ध… | sarva pitru amavasya in hindi

यदि आप पिछले कुछ सालों से पितृपक्ष में परिवार के दिवंगत लोगों का श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, तो धर्म शास्त्रों में इसका भी विकल्प उपलब्ध है। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम में ऐसे लोग अमावस्या तिथि को अपने पितरों के नाम पिंडदान और तिलांजलि देकर अपने उत्तरदायित्व का पालन करते हुए श्राद्ध करने से यश के भागी होते हैं। त्र्यंबकेश्वर, द्वारका, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी, प्रयाग, हरिद्वार, पिहोवा (हरियाणा) आदि तीर्थस्थलों में भी ऐसे लोग एक ही बार में सभी पितरों का श्राद्ध कर सकते हैं। sarva pitru amavasya in hindi

जो इस कर्म को करने से वंचित रह गए हों, ऐसे सभी श्राद्ध पितृपक्ष के दौरान कभी भी किए जा सकते हैं, लेकिन अमावस्या का श्राद्ध ऐसे भूले-बिसरे लोगों के लिए ग्राहय होता है, जो अपने जीवन में भूल या परिस्थितिवश अपने पितरों को श्रद्धासुमन अर्पित नहीं कर पाते हैं। sarva pitru amavasya in hindi | sarva pitru amavasya in hindi

पितर ऐसे होंगे प्रसन्न…| sarva pitru amavasya in hindi

  • हमारे पितृ अन्न और जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जिस जीव को अपने जीवन में जो पसंद होता है, उसको ही सात्विक रूप से श्राद्ध में रखा जाता है। इसलिए श्राद्ध में चावल के आटे से अथवा उबले हुए चावलों से पिंड बनाया जाता है और अमुक पितृ के निमित्त इस पिंड को यथासंभव नदी तट पर बैठकर पितृ को समर्पित किया जाता है। sarva pitru amavasya in hindi

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  • दांएं हाथ में कुश बांधकर और बाएं हाथ में जलपात्र लेकर जलधारा से पितरों का तर्पण करें। तर्पण का जल ऐसे गिराएं कि अंगूठे से जलधारा पात्र में गिरे। तदुपरांत काले तिल और कुश के साथ पितरों के लिए भोजन का दान करें अथवा ब्राह्रणों को भोजन के लिए कहें। sarva pitru amavasya in hindi | sarva pitru amavasya in hindi
  • पितृ पिंडदान के लिए चावल का आटा, तिल, जौ, मिष्ठान्न, कुश आसन, कुश पवित्री, लोटा आदि पात्र, थाली, चंदन, सफेद फूल आवश्यक हैं। मध्याह्न काल में जिस पितृ का श्राद्ध हो, उसके निमित्त श्रद्धा पूर्वक ब्राह्मण को भोजन कराया जाता है। sarva pitru amavasya in hindi
  • यदि आप बाहर हैं और ये सारे उपक्रम नहीं कर सकते हैं तो जलपात्र में काले तिल डालकर दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके तर्पण कर सकते हैं। sarva pitru amavasya in hindi

Image Courtesy: Webdunia.| sarva pitru amavasya in hindi | sarva pitru amavasya in hindi

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