कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता – A Must-Read Motivational Story!

एक राजा शिकार खेलते-खेलते रास्ता भटक गया। भूख प्यास से बेहाल। वह राजा न लगकर कोई साधारण नागरिक लग रहा था। भटकते-भटकते वह एक किसान के पास गया। उससे कहा कि मुझे कुछ खाने को मिलेगा? किसान ने उसे खरबूजों से भरा खेत दिखा दिया। और कहा, पूरा खेत मीठे खरबूजों से लबालब है। तोड़ो, खाओ, और अपनी भूख मिटाओ।

फिर किसान ने कहा, ‘पूरा खेत तुम्हारा है, पर एक खरबूजे को मत तोड़ना। उसे मैंने बडे़ प्रेम से पाला है। इसे मैं राजा को देने जाऊंगा।’ कहते हुए किसान ने वह खास खरबूजा राजा को दिखाया। खेत के बीचों बीच बेहद सुंदर। तब नागरिक बने राजा ने कहा, ‘अगर वह राजा इस खरबूजे को न ले तो?’ तब किसान ने आग बबूला हो कर कहा, ‘भाड़ में जाए वो…। मैंने तो बडे़ प्रेम से पाला है इस खरबूजे को उसके लिए।’

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राजा राजमहल में लौटा। कुछ दिनों बाद राजदरबार में वह किसान आया। कंधे पर खरबूजा लिए। किसान ने जैसे ही राजा को देखा तो वह समझ गया कि यह तो वही था, जो पिछले दिनों उसके खेत पर आया था। तब राजा ने कहा अगर मैं अब भी यह खरबूजा लेने से मना कर दूं तो? किसान ने उसी तिरस्कार युक्त आनंद से कहा, ‘लो तो लो वरना रही वही खेत वाली बात।’

अब सोच-समझ और मनन कर लें मित्र। प्राप्त करें अपना अवबोध और कर सकें तो कर लें बोध।

  • किसान ने अपने खेत की फसल में क्यों रुचि दिखाई?
  • मैं अपना काम कितने दिल से करता हूं?
  • दिल से किए गए काम की कितनी अधिक महत्ता होती है?
  • दिल से, अपने भीतर की ऊर्जा से किया गया काम मुझे कितनी खुशी देता है?
  • दिल से काम करने के बाद मैं लोगों की प्रतिक्रिया का कितना ध्यान रखता हूं?
  • मैं अपने कौन-कौन से काम दिल से करता हूं?

दोस्तों, कोई भी काम बड़ा या छोटा नहीं होता है। काम करने का ढंग ही काम को महत्वपूर्ण बना देता है। हर एक काम को उसके करने वाले व्यक्ति की वजह से ही शोहरत या बदनामी मिलती है। किया गया काम ही उस व्यक्ति के व्यक्तित्व को प्रकट करता है। तो क्यों ना हम अपने काम को संपन्न करने में सम्पूर्ण दिल लगा दें?

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मन से, दिल से, अपने पूरे बौद्धिक संवेग से किया गया कार्य महान बन जाता है। आंधियों के डर से अपने ही दीपक को बुझाना बेवकूफी है। यदि हम पूरी उर्जा और मनोयोग से अपने कर्म का दीपक जलाते रहें, तो देखना आंधी उस दीये को और रोशनी से भर देगी। लोगों की परवाह न करें। दिल से काम करें। बाकी लोग कुछ कहें तो ‘भाड़ में जाएं।’

Image Courtesy: Hansel and Regrettal via Flickr.

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