Happiness Tips in Hindi: How to Live a Happy Life

जीवन में सदा खुश कैसे रहें – Valuable Tips For a Happy Life

एक निठल्ला आदमी एक पेड़ के नीचे सो रहा था। एक साहूकार उधर से गुजरा। उसने कहा, ‘तुम इस तरह जमीन पर सो रहे हो। कुछ काम क्यों नहीं करते?’

‘काम करने से क्या होगा?’
‘काम करने से पैसे मिलेंगे।’

‘पैसों का क्या करना है?’
‘उससे तुम सुख-सुविधा के सब साधन खरीद सकते हो।’

‘उसके बाद क्या करूंगा?’
‘उसके बाद खुशी से पैर पसार कर सोना।’

‘मैं अभी भी तो वही कर रहा हूं।’
‘इस तरह की अकर्मण्यता खुशी नहीं, खुदकुशी है।’ कहकर साहूकार अपनी राह चल पड़ा।

खुशी कहां मिलती है? किसी खूबसूरत हिल स्टेशन पर या किसी मनभावन समुद्र तट पर। किसी डिस्कोथेक में, किसी रंगारंग पार्टी में या किसी पूजाघर में? अगर आप भी करोड़ों लोगों की तरह इन जगहों पर खुशी तलाश रहे हैं, तो एक बात जान लीजिए कि ये जगहें आपको खुश रखने में सहायक हो सकती हैं, या खुशी के उत्प्रेरक का काम कर सकती हैं, लेकिन वास्तव में खुशी तो आपके भीतर ही होती है। कई बार आपने देखा भी होगा कि अगर आप भीतर से खुश नहीं हैं, तो कोई खबसूरत हिल स्टेशन आपको खुश करने के बजाय और उदास कर देता है। अगर आप भीतर से दुखी हों, तो कोई रंगारंग पार्टी आपको और अकेला कर देती है।

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ऐसे में सवाल यह है कि क्या अपने भीतर खुशी को रोपा जा सकता है? हाँ! क्यों नहीं, बशर्ते आपको यह पता चल सके कि वास्तविक खुशी क्या चीज है और आपके आस-पास वह कौन सी चीज है, जो आपको खुश होने से रोक रही है। अगर आप उस बाधा को समझ लेंगे, तो उससे पार पाने का उपाय भी ढूंढ़ लेंगे। कुछ लोगों के लिए आर्थिक संपन्नता खुशी की सबसे बड़ी वजह हो सकती है, तो कुछ लोगों के लिए भावनात्मक अनुभूतियां संपन्नता से अधिक मायने रखती हैं।

पिछले वर्षों में दुनिया की अनेक संस्थाओं द्वारा किए गए अनेक सर्वे भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि अलग-अलग लोगों के लिए खुशी के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। इसलिए सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि खुशी आखिर है क्या? और इस सवाल का जवाब जितना आसान है उतना ही कठिन भी। आम आदमी अगर अपने लिए थोड़ी सी खुशी ढूंढ़ रहा है, तो दुनिया भर में बड़े-बड़े विशेषज्ञ खुशी के मायने ढूंढ़ने में लगे हैं। और इनके मापदंड इतने अलग हैं कि खुशी खुद भी चक्कर में पड़ जाए कि आखिर मैं हूं कौन?

फिर वास्तव में खुशी क्या है? प्रसिद्ध दार्शनिक अरस्तू ने कहा था कि खुशी जीवन का अर्थ और उद्देश्य दोनों है। अरस्तू ने सच ही कहा था। खुशी ही तो जीवन का उद्देश्य है और इसके बिना जीवन का वास्तव में कोई अर्थ नहीं है। इसीलिए तो हर व्यक्ति खुशी की तलाश में रहता है। पर ज्यादातर लोग यह नहीं जानते कि खुशी क्या है, इसलिए वे खुशी के बजाय सुविधाएं जुटाते रहते हैं। और जब सारी सुविधाएं जुटा लेते हैं, तो उन्हें पता चलता है कि सब कुछ तो मिल गया पर खुशी कहां है। ऐसे में मनुष्य लाइफ मैनेजमेंट गुरुओं के चक्कर लगाता है। लाइफ मैनेजमेंट गुरु भी उसे वही चीजें बताते हैं, जो उसे पहले से पता होती हैं। कि मन में सकारात्मक विचार रखोजो है उसी में संतुष्ट होना सीखोभौतिक पूंजी के साथ-साथ भावनात्मक पूंजी भी इकट्ठा करो। और यह सब करते हुए भी कर्म को मत भूलो, वरना आर्थिक दुश्वारियां भी आपको कभी खुश नहीं होने देंगी।

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बहरहाल खुशी को समझने के सबके अपने-अपने फंडे हैं। कोई अपनी छोटी सी कमाई में ही खुश रह लेता है और कोई भारी बैंक बैलेंस के बावजूद भी खुश रहना नहीं सीख पाता। ऐसा इसलिए है क्योंकि पैसे से भौतिक सुख और वित्तीय सुरक्षा तो हासिल की जा सकती है, लेकिन खुशी नहीं खरीदी जा सकती है। वास्तव में, पैसे और खुशी के बीच कोई सीधा रिश्ता ही नहीं है। खुशी या निर्मल आनंद जैसा अनुभव अनेक अन्य चीजों पर निर्भर है जैसे सामाजिक सम्मान, स्वतंत्रता का अनुभव, सच्चा प्रेम, सच्ची मित्रताएं, जॉब सैटिस्फैक्शन, जॉब सिक्योरिटी, व्यक्तिगत स्वास्थ्य, परिजनों के साथ भावनात्मक संबंध, बच्चों के भविष्य की सुरक्षा इत्यादि।

सार यह है कि आप जितने अधिक समृद्ध होंगे आपके जीवन में उतनी ही संतुष्टि होगी, लेकिन संतुष्टि और खुशी एक ही चीज नहीं हैं। आपको अपनी खुशी तलाशने के लिए अपना एक अलग फार्मूला बनाना होगा। कबीर जी के यह पद याद रखिये:

साई इतना दीजिए, जामें कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा ना रहूं, साधु न भूखा जाय।

गोधन, गजधन, बाजिधन और रतन धन खान।
जब आवे संतोष धन, सब धन धूरि समान।

और अंत में महात्मा बुद्ध की एक बात याद रखिए,

‘जिस तरह एक मोमबत्ती से हजारों मोमबत्तियां जलाई जा सकती हैं और उस मोमबत्ती की उम्र कम नहीं होती, उसी तरह खुशी भी बांटने से कम नहीं होती।’

इसलिए एक छोटी सी खुशी तलाशो और उसे बांटते रहो। ख़ुशी को तो जितना बांटोगे, उतनी ही बढ़ेगी।

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Image: wallpaperscraft.

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