Valentine Day Message in Hindi - वैलेंटाइन डे, युवा पीढ़ी और प्रतिस्पर्धी बाज़ार

प्रेम का व्यापार – वैलेंटाइन डे, हमारी युवा पीढ़ी और ये प्रतिस्पर्धी बाज़ार!

  • सात फरवरी रोज डे
  • आठ फरवरी प्रपोज डे
  • नौ फरवरी चॉकलेट डे
  • दस फरवरी टैडी डे
  • ग्यारह फरवरी प्रॉमिस डे
  • बारह फरवरी किस डे
  • तेरह फरवरी हग डे
  • चौदह फरवरी वेलेंटाइन डे
  • पंद्रह फरवरी स्लैप डे

प्रेम न उपजे बाउड़ी, प्रेम न हाट बिकाय।
राजा प्रजा जेहि रुचे, शीष देहि ले जाए।।

कबीर जी ने भले ही कह दिया हो कि प्रेम बाजार में बिकाऊ नहीं है लेकिन आज के बाजारवाद ने इस बात को बहुत पीछे छोड़ दिया है। दो दशक पहले युवाओं के बीच वेलेंटाइन डे का प्रचलन बढ़ना शुरू हुआ। युवा भावनाओं का बाजार ने जमकर दोहन किया। इस तरह प्रचारित किया कि भारतीय संस्कृति में विद्यमान मदनोत्सव को लोग भूल गए और वेलेंटाइन का खुमार चढ़ गया। बाजार की स्पर्धा यहीं समाप्त नहीं हुई। अब सिर्फ 14 फरवरी को ही केंद्र बिंदु नहीं रखा गया है बल्कि पूरा का पूरा वेलेंटाइन वीक ही घोषित कर दिया गया। बाजार के बीच खड़े इस प्रेम में संवेदना और भावनाओं की तलाश कर रहे युवा मन के बीच मदनोत्सव के लिए कहीं जगह बनानी होगी। यह अच्छा संकेत है कि अब इस संबंध में बात तो होने लगी है। जाहिर है जब विचार है तो पल्लवित भी होगा। ऐसी कामना की जानी चाहिए।

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वेलेंटाइन डे, यानी इजहार-ए-प्यार का दिन। वेलंटाइन बाबा की याद में हम सभी इसे मनाने लगे हैं। युवा तो इस दिन का विशेष इंतजार करते हैं। हो भी क्यों न, अपनी भावनाओं के इजहार का इससे बेहतर दिन भला और कोई हो सकता है! बाजार भी पहले से ही सज-धजकर तैयार बैठा होता है, उनकी भावना को भुनाने के लिए। एक से एक रंग-बिरंगे कार्ड दुकानों पर लटकते दिखते हैं। उनमें बोलते हुए शब्द…गुलाब लाल/और वायलेट्स नीले हैं/शक्कर वैसी मीठी/जैसी तुम हो…और न जाने क्या-क्या। अब तो इस दिन को लेकर स्कूल के छात्र-छात्राओं में भी आकर्षण दिखने लगा है। वे प्रेम का इजहार महंगे से महंगे गिफ्ट देकर करना चाहते हैं। उन्होंने वेलेंटाइन-गिफ्ट को ही अपने प्रेम तथा प्रतिष्ठा का प्रतीक मान लिया है, यानि कि जितना कीमती गिफ्ट, उतना अधिक प्रेम-प्रतिष्ठा।

युवाओं, खासकर स्कूली बच्चों की इसी सोच को व्यापारिक कंपनियों ने अब भुनाना शुरू कर दिया है। अनेकानेक प्रकार के कीमती, महंगे, लुभावने व आकर्षक गिफ्ट बाजार में उतरने लगे हैं। गली-कूचे भरे पड़े रहते हैं, ऐसे लुभावने गिफ्ट-आइटम्स से। चूंकि इजहार-ए-मोहब्बत महंगे गिफ्ट से करना है, इसलिए साधन से अधिक कीमती वस्तु खरीदने की होड़ बनी रहती है। और इसी दौड़ को जीतने के लिए माता-पिता से पैसा वसूलने के अलावा पॉकेट खर्च और दिन के भोजन में कटौती तक करने से नहीं हिचकती है, हमारी यह नौजवान पीढ़ी।

ये बच्चे यहीं तक नहीं रुकते। वे वेलेंटाइन डे को घर से बाहर, अपने साथी के साथ, देर रात तक रंगीन उत्सव के रूप में मनाने को तत्पर रहते हैं। उन्हें इसमें किसी की दखलंदाजी पसंद नहीं, मां-पिता की भी नहीं। टोकने पर जवाब स्पष्ट होता है, ‘डैड, मुझे अनसब्सटैंशिल (निराधार) मत समझिए। बिलकुल नहीं।’ पर उन्हें मालूम नहीं होता कि घर की यही स्थिति बच्चों और अभिभावकों के बीच खाई उत्पन्न कर रहा है। आलम यह है कि ये बच्चे ‘हेल्प लाइन’ तक पहुंचने में भी नहीं हिचकते। अपने माता-पिता के विरुद्ध वे शिकायत दर्ज कराते हैं कि उनकी रोकने की दलील समझदारी नहीं है। बच्चों में यह उन्माद और तनाव वेलेंटाइन-डे से पहले ही शुरू हो जाता है, जो ‘प्यार के दिन’ पराकाष्ठा पर पहुंच जाता है। इन्हें रोकने के लिए यदि स्कूल प्रशासन भी सख्त रवैया अपनाता है, तो स्थिति और भी प्रतिकूल हो जाती है। छात्र अपने प्यार की कीमत चुकाने के लिए कुछ भी करने को तैयार होता है। आज अपरिपक्व बाल-मन को प्यार-प्रदर्शन के इस रोमांसवादी, अपव्ययी-आसक्ति से प्रेमपूर्वक विमुख करने की आवश्यकता है।

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‘जो अपने माता-पिता का ही नहीं, वह अन्य किसका होगा! जिनके कष्टों और आंसुओं की शक्ति से अस्तित्व प्राप्त किया, उन्हीं के प्रति अनास्था रखने वाला व्यक्ति पत्नी, पुत्र, भाई और समाज के प्रति क्या आस्था रखेगा? ऐसे पाखंडी से दूूर ही रहना श्रेयस्कर होगा…’ बोधायन ऋषि ने यह वाक्य सदियों पहले कहा था। यह व्यक्ति को परखने की कसौटी भी है। वेलेंटाइन डे जैसे दिनों में अपने कथित समर्पण का उन्मुक्त प्रदर्शन करने वाले क्या अपने माता-पिता के प्रति भी वैसा ही समर्पण रखते हैं? अगर नहीं तो क्यों नहीं? जो लोग उस अमुक व्यक्ति से जुड़ रहे हैं उनके लिए भी यह मानक है कि वह देखें कि उस व्यक्ति का अपने माता पिता और परिवार वालों के लिए क्या रवैया है। अगर वह उनके प्रति ईमानदार नहीं है तो उसकी आपके प्रति ईमानदारी भी संदेह के घेरे में है।

Image Source: Pixabay.

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